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Bihar- 15 अप्रैल तक बिहार में सत्ता बदलाव के संकेत, यात्रा खत्म होते ही इस्तीफा दे सकते हैं नीतीश

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: March 19, 2026 • 10:35 AM
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नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आ सकता है। (Nitish Kumar )के राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद अब उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने की चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि अप्रैल के मध्य तक राज्य में नई सरकार का गठन हो सकता है।

राज्यसभा सदस्य बनने के बाद बढ़ा इस्तीफे का दबाव

संवैधानिक नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति एक साथ दो सदनों का सदस्य नहीं रह सकता। ऐसे में राज्यसभा के लिए 16 मार्च को निर्वाचित होने के बाद अब Nitish Kumar के सामने एक सदन चुनने की बाध्यता है। उन्हें 14 दिनों के भीतर फैसला लेना होगा, जिसकी अंतिम तारीख 30 मार्च मानी जा रही है।हालांकि, उनके पास विकल्प है कि वे विधान परिषद से इस्तीफा देकर कुछ समय तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं, लेकिन राजनीतिक संकेत कुछ और ही इशारा कर रहे हैं।

यात्रा के बाद इस्तीफे की संभावना

सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री अपनी चल रही “समृद्धि यात्रा” खत्म होने के बाद इस्तीफा दे सकते हैं। ऐसे में अप्रैल के पहले या दूसरे सप्ताह में बड़ा राजनीतिक फैसला देखने को मिल सकता है।

बीजेपी के लिए ऐतिहासिक मौका

अगर Nitish Kumar मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं, तो बिहार में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का नेता मुख्यमंत्री बन सकता है। 2005 से एनडीए सरकार में मुख्यमंत्री पद हमेशा जेडीयू के पास रहा है, जबकि कई बार ज्यादा सीटें होने के बावजूद बीजेपी इस पद से दूर रही। 2020 और 2025 के चुनावों में भी बीजेपी के पास जेडीयू से ज्यादा विधायक होने के बावजूद गठबंधन धर्म के तहत मुख्यमंत्री पद Nitish Kumar के पास ही रहा।

बंगाल चुनाव से पहले रणनीतिक बदलाव

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बदलाव सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है। बीजेपी नेतृत्व चाहता है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाकर राजनीतिक संदेश दिया जाए। इस कदम के जरिए पार्टी पिछड़े वर्ग और अन्य समुदायों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, जिसका असर बंगाल चुनाव में भी देखने को मिल सकता है।

सीएम पद की रेस में कई दावेदार

मुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें (Nityanand Rai), Dilip Jaiswal और Vijay Sinha शामिल हैं। इसके अलावा मौजूदा डिप्टी सीएम Samrat Choudhary का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। पार्टी उन्हें ओबीसी चेहरे के तौर पर पेश कर चुकी है, जो बिहार के सामाजिक समीकरण में अहम भूमिका निभा सकता है।

सम्राट चौधरी पर बन सकती है सहमति

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार (Samrat Choudhary) के नाम पर सहमति बनने की संभावना ज्यादा है। वे संगठन और नेतृत्व दोनों के करीब माने जाते हैं और उनकी छवि एक मजबूत ओबीसी नेता की है।

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एनडीए की रणनीति बनाम विपक्ष का आरोप

जहां एनडीए इस पूरे घटनाक्रम को विकास और स्थिरता की रणनीति बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे बीजेपी की सियासी चाल करार दे रहा है। फिलहाल बिहार की राजनीति में हलचल तेज है और माना जा रहा है कि 15 अप्रैल से पहले राज्य को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है।

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