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Sonia Gandhi: खामेनेई की हत्या और भारत की ‘चुप्पी’ पर सोनिया गांधी के कड़े सवाल

Author Icon By Dhanarekha
Updated: March 3, 2026 • 1:36 PM
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अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन और भारत की भूमिका

नई दिल्ली: सोनिया गांधी(Sonia Gandhi) ने अपने लेख में तर्क दिया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की लक्षित हत्या अंतरराष्ट्रीय कानूनों, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र(United Nations) चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब दो देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत चल रही हो, तब किसी राष्ट्राध्यक्ष की हत्या करना वैश्विक व्यवस्था के लिए खतरनाक है। सोनिया के अनुसार, भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र(Democracy) का इस घटना पर मौन रहना कूटनीतिक तटस्थता नहीं, बल्कि अपनी नैतिक जिम्मेदारी से पीछे हटना है

विदेश नीति में बदलाव और रणनीतिक स्वायत्तता पर संकट

कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री मोदी की हालिया इजराइल यात्रा और उसके तुरंत बाद हुई इस घटना के समय पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक विदेश नीति हमेशा(Sonia Gandhi) ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ और गुटनिरपेक्षता पर आधारित रही है, जिससे भारत को संकट के समय अरब देशों में रहने वाले करोड़ों भारतीयों की सुरक्षा करने में मदद मिली। सोनिया का मानना है कि वर्तमान सरकार का झुकाव भारत की उस स्वतंत्र छवि को नुकसान पहुँचा रहा है, जो पहले तेहरान और तेल अवीव दोनों के साथ संतुलन बनाए रखने में सक्षम थी।

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ऐतिहासिक संबंधों का हवाला और संसद में बहस की मांग

लेख में 1994 के उस वाकये का जिक्र किया गया है जब ईरान ने कश्मीर मुद्दे पर भारत का साथ दिया था। सोनिया गांधी ने याद दिलाया कि भारत-ईरान संबंध केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि चाबहार पोर्ट और सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने मांग की है कि इस गंभीर विषय पर, जिसमें अंतरराष्ट्रीय संप्रभुता और पश्चिम एशिया की स्थिरता दांव पर है, संसद के आगामी सत्र में विस्तृत और खुली बहस होनी चाहिए ताकि भारत का रुख स्पष्ट हो सके।

सोनिया गांधी ने भारत सरकार की चुप्पी को ‘जिम्मेदारी से पीछे हटना’ क्यों कहा है?

सोनिया गांधी का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों(Sonia Gandhi) के तहत किसी देश की संप्रभुता का उल्लंघन और राष्ट्राध्यक्ष की हत्या पर चुप रहना गलत है। यदि भारत जैसे प्रभावशाली देश ऐसे समय में आवाज नहीं उठाते, तो वैश्विक नियम कमजोर होते हैं और इससे भारत की एक निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में विश्वसनीयता कम होती है।

लेख में 1994 की किस घटना का उल्लेख किया गया है और वह क्यों महत्वपूर्ण है?

1994 में जब कुछ देशों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ प्रस्ताव लाने की कोशिश की थी, तब ईरान ने भारत का समर्थन कर उसे रुकवाया था। इसका उल्लेख यह दर्शाने के लिए किया गया है कि ईरान ने ऐतिहासिक रूप से भारत के रणनीतिक हितों का समर्थन किया है।

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