CBSE- 25 से अधिक देशों में फैला नेटवर्क, दुनिया में गूंजा भारत का परचम

Read Time:  1 min
भारत
भारत
FONT SIZE
GET APP

नई दिल्ली,। दुबई की तपती धूप हो या रूस की कड़ाके की ठंड, मार्च के महीने में हजारों छात्र ठीक उसी तरह की बेचैनी और नर्वसनेस महसूस करते हैं, जैसी दिल्ली या मुंबई (Delhi or Mumbai) के किसी स्कूल में पढ़ने वाले छात्र को होती है। इस वैश्विक जुड़ाव की एकमात्र वजह है केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की परीक्षाएं। भारत का यह प्रतिष्ठित बोर्ड आज केवल देश की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के 25 से अधिक देशों में अपनी धाक जमा चुका है।

खाड़ी से यूरोप तक सीबीएसई की पहुंच

खाड़ी देशों के आलीशान परिसरों से लेकर अफ्रीका (Africa) के सुदूर क्षेत्रों तक, सीबीएसई का नाम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का पर्याय बन गया है। आखिर हजारों मील दूर विदेशी जमीन पर बैठा भारतीय समुदाय अपने बच्चों को इसी बोर्ड से क्यों पढ़ाना चाहता है, यह समझना बेहद दिलचस्प है।

प्रवासी भारतीयों की जड़ों से जुड़ाव की कहानी

दरअसल, यह कहानी सिर्फ किताबी पढ़ाई की नहीं, बल्कि उन लाखों प्रवासी भारतीय परिवारों की अपनी जड़ों से जुड़े रहने की भावनात्मक जरूरत की है। जो लोग रोजी-रोटी के लिए विदेश चले गए, वे नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे भारतीय संस्कृति और शिक्षा पद्धति से दूर हों। जो सिलसिला प्रवासियों की जरूरत के रूप में शुरू हुआ था, आज वह एक वैश्विक मॉडल बन चुका है।

वर्तमान में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब, कुवैत, कतर और सिंगापुर जैसे देशों में सीबीएसई का सबसे बड़ा दबदबा है। अकेले यूएई में ही 100 से अधिक स्कूल इस बोर्ड से संबद्ध हैं। इसके अलावा जापान, रूस, मलेशिया, नेपाल, थाईलैंड और इथियोपिया जैसे देशों में भी भारतीय समुदाय की सक्रियता के कारण ये स्कूल सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं।

अन्य पढ़े: जंग की आग से तेल बाजार में उछाल, कच्चा तेल 80 डॉलर के पार

सरकारी नहीं, निजी प्रबंधन में चलते हैं अधिकांश स्कूल

एक आम गलतफहमी यह है कि विदेश में चल रहे सभी सीबीएसई स्कूल सरकारी या केंद्रीय विद्यालय हैं। वास्तविकता यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित अधिकांश सीबीएसई स्कूल निजी प्रबंधन के हाथों में हैं, जिन्हें वहां रहने वाले बड़े भारतीय व्यापारिक समूहों या शिक्षा समितियों द्वारा चलाया जाता है। काठमांडू, तेहरान या मॉस्को जैसे कुछ शहरों में भारतीय दूतावास की देखरेख में स्कूल चलते हैं, जबकि केंद्रीय विद्यालय की शाखाएं केवल कुछ चुनिंदा स्थानों पर ही उपलब्ध हैं।

Read More :

Anuj Kumar

लेखक परिचय

Anuj Kumar

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।