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News Hindi : भारतीय मूल्यों पर आधारित शिक्षण संस्थान की स्थापना करना, सच्ची राष्ट्रसेवा – लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी

Ajay Kumar Shukla
Ajay Kumar Shukla
News Hindi : भारतीय मूल्यों पर आधारित शिक्षण संस्थान की स्थापना करना, सच्ची राष्ट्रसेवा – लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी

संस्थापक-सप्ताह उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए यूपी एडीआरएफ के उपाध्यक्ष

लखनऊ। गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद (Maharana Pratap Education Council) के संस्थापक-सप्ताह समारोह 2025 का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (Lieutenant General Yogendra Dimri) जी (से.नि.) शामिल हुए।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी ने छात्र-छात्राओं को महाराणा प्रताप के अनुकरणीय जीवन से प्रेरणा लेने और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अनुशासन, साहस, समर्पण, समानता और प्रतिबद्धता के मूल्यों को अपनाने लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल सीमा पर साहस दिखाना ही नहीं बल्कि इमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन करना, पर्यावरण की रक्षा, लोक कल्याण और समाज का एक अच्छा नागरिक बनना भी वास्तविक देशभक्ति है। उन्होंने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के माध्यम से आप सफलता के इन मूल्यों का संस्कार प्राप्त कर रहे हैं।

1916 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी और 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की गोरखपुर में नींव रखना भारतीयता और राष्ट्र की सच्ची सेवा थी

महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक-सप्ताह समारोह 2025 के उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन गोरखपुर में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने अंग्रजों के शासन और स्वतंत्रा संघर्ष के दौरान भारतीय संस्कारों और शिक्षा मूल्यों पर आधारित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना और उसके निरंतर राष्ट्रसेवा में योगदान देने की सरहाहना की एवं शिक्षा परिषद के संस्थापकों के प्रति आभार और सम्मान व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि जब देश में अग्रेंजी शासन और अंग्रेजियत का बोलबाला था ऐसे में 1916 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी और 1932 में महाराणा प्रतापा शिक्षा परिषद की गोरखपुर में नींव रखना भारतीयता और राष्ट्र की सच्ची सेवा थी। उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक महंत दिग्विजय नाथ, राष्ट्र संत महंत अवेद्यनाथ व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं शिक्षा परिषद के सभी शिक्षकों राष्ट्रसेवा के इस संकल्प को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया।

महाराणा प्रताप का जीवन हम सबके लिए अनुकरणीय

उद्घाटन अवसर पर छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन हम सबके लिए अनुकरणीय है किस प्रकार उन्होंने अकेले, अन्य राजपूत राजाओं के सहयोग के बिना भी शक्तिशाली मुगल साम्राज्य की अवज्ञा की और आत्मबलिदान, त्याग और समर्पण के मूल्यों की अमर गाथा हम सबके लिए ये प्रस्तुत की।

यही कारण था कि 17वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज हो या 19वीं, 20वीं शताब्दी के राष्ट्र के क्रांतिकारियों ने उनसे प्रेरणा प्राप्त की। महाराणा प्रताप के जीवन से हमें अनुशासन, ईमानदारी, समर्पण और प्रतिबद्धता के जिन मूल्यों की शिक्षा मिलती है वो ही आपको जीवन में सफल बनाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि महाराणा प्रताप शिक्षण संस्थान में आप इन मूल्यों और संस्कारों को प्राप्त कर रहे हैं।

महाराणा प्रताप का इतिहास क्या है?

महाराणा प्रताप मेवाड़ के महान राजपूत राजा थे, जिनका जन्म 1540 में हुआ। उन्होंने अकबर के खिलाफ स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा के लिए जीवनभर संघर्ष किया। हल्दीघाटी के युद्ध में उनकी वीरता, स्वाभिमान और संघर्षशीलता ने उन्हें भारतीय इतिहास का अद्वितीय योद्धा बनाया।

इतिहास में सबसे भारी तलवार किसकी थी?

इतिहास में सबसे भारी तलवार महाराणा प्रताप की मानी जाती है। कहा जाता है कि उनकी तलवार लगभग 17 से 25 किलो तक होती थी, जिसे वे आसानी से चलाते थे। इसके अलावा उनका कवच और भाला भी अत्यधिक भारी था, जिससे उनकी शारीरिक क्षमता और युद्ध कौशल का पता चलता है।

महाराणा प्रताप इतने प्रसिद्ध क्यों थे?

महाराणा प्रताप अपनी अडिग स्वतंत्रता-भावना, पराक्रम और स्वाभिमान के कारण प्रसिद्ध थे। उन्होंने मुगल सम्राट अकबर के सामने झुकने से इनकार किया और कठिन परिस्थितियों में भी मेवाड़ की रक्षा की। उनका जंगलों में संघर्ष, हल्दीघाटी युद्ध और जन-कल्याणकारी नेतृत्व उन्हें अमर बनाता है।

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