नई दिल्ली। होर्मुज संकट (Hormuz Strait) के बीच रूस ने भारत के साथ अपनी दोस्ती निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पहले कच्चा तेल और अब बड़े पैमाने पर कोयले की आपूर्ति कर रूस भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रहा है। भारत के उद्योगों और बिजलीघरों के लिए कोयला एक अनिवार्य संसाधन है, और मौजूदा वैश्विक हालात में यह आपूर्ति बेहद महत्वपूर्ण बन गई है।
ऊर्जा संकट के बीच राहत की आपूर्ति
वैश्विक बाजार में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में उछाल के बीच रूस से आने वाला कोयला भारतीय पावर ग्रिड (Indian Power Grid) और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है। रूस ने बिना देरी किए अपने मालवाहक जहाजों को भारतीय तटों की ओर रवाना कर दिया है।
होर्मुज संकट के बाद बदला रुख
ईरान द्वारा मार्ग प्रभावित होने के बाद रूस ने अपने तेल और गैस टैंकरों (Gas Tanker) का रुख भारत की ओर मोड़ दिया। इसके साथ ही उच्च गुणवत्ता वाले कोयले की सप्लाई भी तेजी से बढ़ाई गई है, जिससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग और मजबूत हुआ है।
भारतीय बंदरगाहों पर बढ़ी रूसी जहाजों की आवाजाही
भारतीय बंदरगाहों पर रूसी कोयले से लदे जहाजों की बढ़ती आमद इस बात का संकेत है कि ऊर्जा सुरक्षा को लेकर दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी नए स्तर पर पहुंच रही है।
आंकड़ों में दिखी तेज बढ़ोतरी
हालिया आंकड़ों के मुताबिक, मार्च की शुरुआत से ही रूस से कोयले के आयात में तेजी आई है। महीने के पहले 21 दिनों में ही यह आयात फरवरी के मुकाबले 25 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जबकि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले इसमें करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
आने वाले समय में और बढ़ सकती है निर्भरता
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में जारी तनाव और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत आने वाले समय में रूसी कोयले पर अपनी निर्भरता और बढ़ा सकता है। अनुमान है कि मार्च के अंत तक आयात में 20 से 35 प्रतिशत तक और बढ़ोतरी हो सकती है।
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