मुख्य बातें: –
- अरावली की नई परिभाषा तय होने तक “एक इंच” क्षेत्र में भी खनन की इजाजत नहीं होगी : अदालत
- पीठ ने कहा कि यदि किसी का खनन पट्टा रद्द होता है तो वह कानूनी प्रक्रिया के तहत चुनौती दे सकता है
- स्थानीय स्तर से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले भूभाग को अरावली पहाड़ी माना जाए
नई दिल्ली । (Supreme Court of India) ने अरावली पर्वतमाला में खनन गतिविधियों को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि अगले आदेश तक क्षेत्र में किसी भी नए खनन कार्य की अनुमति नहीं दी जाएगी। अदालत ने कहा कि विशेषज्ञ समिति द्वारा अरावली की नई परिभाषा तय होने तक “एक इंच” क्षेत्र में भी खनन की इजाजत नहीं होगी। चीफ जस्टिस (Surya Kant) और न्यायमूर्ति (Joymalya Bagchi) की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए यह टिप्पणी की।
अदालत बोली- टुकड़ों में नहीं होगी सुनवाई
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अरावली से जुड़ा मामला बेहद संवेदनशील है और इसकी “टुकड़ों में सुनवाई” नहीं की जाएगी। पीठ ने कहा कि जब तक अदालत पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाती, तब तक किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। अदालत फिलहाल “अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की परिभाषा और संबंधित मुद्दे” शीर्षक से स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही है।
खनन पट्टा धारकों को राहत नहीं
अदालत ने स्पष्ट किया कि मौजूदा समय में किसी भी खनन पट्टा धारक को राहत नहीं दी जाएगी। पीठ ने कहा कि यदि किसी का खनन पट्टा रद्द होता है तो वह कानूनी प्रक्रिया के तहत चुनौती दे सकता है, लेकिन पर्यावरणीय जोखिम को देखते हुए अदालत जल्दबाजी में कोई आदेश पारित नहीं करेगी।
पहले भी लग चुकी है रोक
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को अरावली क्षेत्र में नए खनन पट्टे जारी करने पर रोक लगाई थी। यह आदेश दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के अरावली क्षेत्रों पर लागू किया गया था। विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया था कि स्थानीय स्तर से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले भूभाग को अरावली पहाड़ी माना जाए, जबकि 500 मीटर के भीतर स्थित दो या अधिक पहाड़ियों के समूह को अरावली पर्वतमाला की श्रेणी में रखा जाए।
पर्यावरणविदों ने जताई थी आपत्ति
नई परिभाषा को लेकर पर्यावरणविदों और कई संगठनों ने चिंता जताई थी। उनका कहना था कि तय मानकों के कारण अरावली का बड़ा हिस्सा पर्यावरण संरक्षण के दायरे से बाहर हो सकता है। इसी विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 29 दिसंबर 2025 को अपने पुराने आदेश पर रोक लगाते हुए सभी खनन गतिविधियों पर अंतरिम प्रतिबंध जारी रखा था।
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पर्यावरण संरक्षण पर अदालत का जोर
सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख से साफ संकेत मिला है कि अदालत अरावली क्षेत्र के संरक्षण को लेकर किसी भी प्रकार की ढील देने के पक्ष में नहीं है। विशेषज्ञ समिति की अंतिम रिपोर्ट आने तक अरावली में खनन गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगी।
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