नई दिल्ली। फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद (Umar Khalid) और शरजील इमाम (Sharjil Imam) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी और कहा कि दंगों में इनकी भूमिका बेहद गंभीर है, इसलिए इन्हें जमानत नहीं दी जा सकती।
5 आरोपियों को मिली जमानत, 12 शर्तों के साथ
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गुलफिशा फातिमा, मेरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि इन्हें लगभग 12 शर्तों के अधीन जमानत पर रिहा किया जाएगा। किसी भी शर्त के उल्लंघन पर ट्रायल कोर्ट उन्हें जमानत रद्द कर सकता है।
उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई थी
आरोपियों ने फरवरी 2020 के दंगों की साजिश मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के 2 सितंबर के आदेश को चुनौती दी थी। 10 दिसंबर को सुनवाई पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
लंबी दलीलें और वरिष्ठ वकीलों की भूमिका
सुनवाई के दौरान सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता, अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल एस.वी. राजू और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक सिंघवी, सिद्धार्थ दवे, सलमान खुर्शीद, सिद्धार्थ लूथरा के बीच लंबी दलीलें चलीं।
पुलिस का रुख
दिल्ली पुलिस ने कहा कि फरवरी 2020 के दंगे अचानक नहीं हुए, बल्कि यह भारत की संप्रभुता पर हमला करने के लिए पूर्व नियोजित थे। उमर, शरजील और अन्य आरोपियों के खिलाफ यूएपीए 1967 और आईपीसी के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज है। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई और 700 से अधिक घायल हुए।
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वकीलों की दलीलें
शरजील इमाम की ओर से सिद्धार्थ दवे ने कहा कि इमाम आतंकवादी या राष्ट्र-विरोधी नहीं हैं और गिरफ्तारी भी दंगों से पहले हुई थी। उमर खालिद की ओर से कपिल सिब्बल (Kapil sibbal) ने कहा कि दंगे के समय उनका मुवक्किल दिल्ली में मौजूद नहीं था।गुलफिशा फातिमा की ओर से अभिषेक सिंघवी (Abhisek Singhwi) ने कोर्ट को बताया कि कार्यकर्ता ने छह साल जेल में बिताए हैं और मुकदमे में देरी अश्चर्यजनक और अभूतपूर्व है।
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