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WB- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, बंगाल में 1.25 करोड़ मतदाताओं की सूची जारी हो

Anuj Kumar
Anuj Kumar
WB- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, बंगाल में 1.25 करोड़ मतदाताओं की सूची जारी हो

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर (SIR) (विशेष गहन पुनरीक्षण) के तहत 1.25 करोड़ वोटरों की सूची सार्वजनिक करने का आदेश दे दिया है। ये वे मतदाता हैं, जिनके नाम कथित गड़बड़ियों के कारण मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इस मामले में अमर्त्य सेन तक को नोटिस भेजे जाने का जिक्र हुआ, वहीं सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) की व्हाट्सएप आधारित कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।

एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश

सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जिन 1.25 करोड़ लोगों के खिलाफ ‘तार्किक विसंगति’ की आपत्ति उठी है, उनके नाम सार्वजनिक किए जाएं।

पंचायत और वार्ड कार्यालयों में प्रकाशित हों नाम

शीर्ष अदालत ने कहा कि इन सभी मतदाताओं के नाम पंचायत और वार्ड कार्यालयों में प्रकाशित किए जाने चाहिए, ताकि प्रभावित लोगों को जानकारी मिल सके।

करीब दो करोड़ लोगों को जारी हुए नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया कि दस्तावेजों के सत्यापन के लिए करीब दो करोड़ लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। इन नोटिसों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है—
पहला, मैप किए गए;
दूसरा, मैप नहीं किए गए;
और तीसरा, तार्किक विसंगति।

क्या है ‘तार्किक विसंगति’

अदालत ने बताया कि ‘तार्किक विसंगति’ श्रेणी में पिता के नाम का मिलान न होना, माता-पिता की आयु में अंतर, दादा-दादी की उम्र से जुड़ी असमानता जैसी आपत्तियां शामिल हैं।

ईसीआई की प्रक्रिया पर अदालत की चिंता

चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि बड़ी संख्या में मतदाता ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ श्रेणी में आ रहे हैं, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

जांच हो पारदर्शी, लोगों को न हो परेशानी

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि जिन लोगों के नाम लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी सूची में डाले गए हैं, उनकी जांच पारदर्शी तरीके से की जाए, ताकि आम लोगों को अनावश्यक परेशानी और मानसिक तनाव का सामना न करना पड़े।

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1.25 करोड़ लोगों की सूची सार्वजनिक करने का आदेश

अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन मतदाताओं को माता-पिता के नाम, उम्र के अंतर या पारिवारिक विवरणों को लेकर नोटिस भेजे गए हैं, उन सभी की सूची चुनाव आयोग को सार्वजनिक करनी होगी।

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