सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 25 अगस्त 2025 को केंद्र सरकार को सोशल मीडिया कंटेंट को नियंत्रित करने के लिए व्यापक दिशानिर्देश तैयार करने और न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (NBSA) के साथ परामर्श करने का आदेश दिया। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की बेंच ने यह निर्देश हास्य कलाकार समाय रैना और पॉडकास्टर रणवीर अल्लाहबादिया जैसे डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स से जुड़ी जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दिशानिर्देश दीर्घकालिक और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर बनाए जाएं, न कि किसी एक घटना के आधार पर त्वरित प्रतिक्रिया के रूप में। केंद्र को नवंबर 2025 तक ड्राफ्ट दिशानिर्देश प्रस्तुत करने होंगे, जब मामले की अगली सुनवाई होगी।
कोर्ट ने जोर दिया कि भारत जैसे सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से विविध देश में हास्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए, लेकिन प्रभावशाली व्यक्तियों को समुदायों की संवेदनशीलता का ध्यान रखना होगा। जस्टिस बागची ने कहा, “हास्य जीवन का हिस्सा है, लेकिन दूसरों का मजाक बनाकर संवेदनशीलता का उल्लंघन अस्वीकार्य है।”
यह मामला रैना के शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ और अल्लाहबादिया के कथित आपत्तिजनक कंटेंट से शुरू हुआ। कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि दिशानिर्देश सेंसरशिप की ओर न बढ़ें, बल्कि सभी हितधारकों—क्रिएटर्स, दर्शकों और नियामकों—के विचारों को शामिल करें। उल्लंघन के लिए स्पष्ट दंड का प्रावधान भी जरूरी होगा। NBSA के साथ परामर्श से डिजिटल और पारंपरिक मीडिया के बीच नियामक सामंजस्य स्थापित करने की कोशिश है।
यह कदम भारत में डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के लिए पहला औपचारिक नियामक ढांचा तैयार कर सकता है, जो ऑनलाइन अभिव्यक्ति और जवाबदेही के बीच संतुलन बनाएगा।
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