पटना । बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र का सोमवार से आगाज हो गया। सत्र के पहले दिन राघोपुर सीट से पुनः निर्वाचित हुए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव (Tejashwi Prasad Yadav) ने ईश्वर की शपथ लेकर विधायक पद की शपथ ग्रहण की। शपथ ग्रहण के साथ ही स्पष्ट हो गया कि वे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाएंगे, जिससे आने वाले दिनों में सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव तेज होने की संभावना है।
उपमुख्यमंत्री और अध्यक्ष का शपथ ग्रहण
सत्र के आरंभ में सबसे पहले उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Smarat Choudhary) ने शपथ ली, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने विधिवत शपथ ग्रहण किया। इसके बाद मंत्रियों और विधायकों को वरीयता क्रम के अनुसार शपथ दिलाई गई। विधानसभा सचिव द्वारा क्रमवार रूप से विधायकों को मंच पर बुलाया गया। शपथ ग्रहण से पूर्व प्रोटेम स्पीकर ने सदन को संबोधित किया, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मौजूद रहे।
243 विधायकों का शपथ ग्रहण
शीतकालीन सत्र का यह पहला दिन राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहा क्योंकि कुल 243 नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण होना था। इसके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू की गई। दो दिसंबर को नए अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा। यह 18वीं विधानसभा का पहला सत्र है, जो हालिया चुनाव और नई सरकार के गठन के बाद बुलाया गया है। आगामी पाँच दिनों तक चलने वाले इस सत्र में कुल पाँच बैठकें होंगी।
सदन में बढ़ता राजनीतिक तापमान
सदन के भीतर राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है। विपक्ष, विशेषकर राजद, शपथ ग्रहण के साथ ही सरकार को घेरने की तैयारी में जुट गया है। नेता प्रतिपक्ष बनने जा रहे तेजस्वी यादव ने सदन पहुंचते ही संकेत दे दिए कि वे महंगाई, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और चुनाव के दौरान उठे ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर सरकार से कठोर सवाल पूछेंगे। वहीं सत्ता पक्ष भी विपक्ष के सवालों का जवाब देने को पूरी तरह तैयार है, जिसकी झलक शपथ ग्रहण के बाद नेताओं के बीच हुई चर्चा में भी दिखाई दी।
विधान परिषद का सत्र भी होगा आयोजित
सिर्फ विधानसभा ही नहीं, विधान परिषद का भी तीन दिवसीय सत्र 3 दिसंबर से 5 दिसंबर तक आयोजित होगा। उम्मीद जताई जा रही है कि सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे और विकास योजनाओं पर विस्तृत चर्चा होगी।
नए राजनीतिक दौर की शुरुआत
तेजस्वी यादव के शपथ ग्रहण के साथ ही राजनीति के एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है, जिसमें सत्ता और विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी भूमिका को बेहद सक्रियता के साथ निभाने के मूड में दिख रहे हैं।
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