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Pakistani Bahu In India : डॉक्टर बहू का जोधपुर में गृह प्रवेश, नेपाल में हुई थी शादी

Author Icon By Surekha Bhosle
Updated: April 20, 2026 • 1:22 PM
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15 साल का लंबा इंतजार

एक भावनात्मक और अनोखी कहानी सामने आई है, जहां एक पाकिस्तानी मूल की डॉक्टर बहू का राजस्थान के जोधपुर में गृह प्रवेश हुआ।

नेपाल में हुई थी शादी

Jodhpur News: राजस्थान के जोधपुर स्थित पाल (Jodhpur) क्षेत्र में एक घर में सोमवार को खुशियों का ऐसा सैलाब उमड़ा, जिसकी उम्मीद पिछले डेढ़ दशक से की जा रही थी. पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत आए एक परिवार ने अपनी बहू का स्वागत पलक-पावड़े बिछाकर किया. यह कहानी है सॉफ्टवेयर इंजीनियर अमित सुथार (Amit Suthar) और पाकिस्तान की डॉक्टर रक्षा सुथार की, जिनका मिलन किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।

इस रिश्ते की बुनियाद साल 2011 से भी पहले रखी गई थी

इस रिश्ते की बुनियाद साल 2011 से भी पहले रखी गई थी. अमित सुथार जब पाकिस्तान में थे, तभी उनके दादाजी और परिवार ने रक्षा के साथ उनका रिश्ता तय कर दिया था. लेकिन 2011 में अमित और उनके पिता प्रदीप सुथार का परिवार बेहतर भविष्य की तलाश में पाकिस्तान छोड़कर जोधपुर आ गया. परिवार तो भारत आ गया, लेकिन अमित की मंगेतर रक्षा सरहद के उस पार ही रह गईं।

भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों और वीजा मिलने में होने वाली देरी के कारण यह रिश्ता साल दर साल खिंचता चला गया. अमित भारत में सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन गए और रक्षा ने पाकिस्तान में अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की, लेकिन दोनों को मिलाने वाली ‘वीजा की मुहर’ नहीं लग पा रही थी।

जब सरहदों ने रोका रास्ता, तो नेपाल बना गवाह

वीजा की बार-बार कोशिशें नाकाम हुईं, तो दोनों परिवारों ने एक अनोखा रास्ता निकाला. चूंकि सीधे भारत या पाकिस्तान का वीजा मिलना मुश्किल था, इसलिए साल 2025 में दोनों परिवारों ने ‘न्यूट्रल वेन्यू’ के तौर पर नेपाल को चुना. 2 जून, 2025 को अमित और उनका परिवार जोधपुर से काठमांडू पहुंचा और रक्षा अपने परिवार के साथ पाकिस्तान से नेपाल पहुंचीं. नेपाल की धरती पर दोनों ने सात फेरे लिए और शादी के बंधन में बंध गए।

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शादी के बाद फिर हुई जुदाई: 10 महीने का कड़ा संघर्ष

शादी के बाद भी रक्षा भारत नहीं आ सकीं. नियमों के मुताबिक, अमित को अकेले जोधपुर लौटना पड़ा और रक्षा को वापस पाकिस्तान जाना पड़ा. निकाह के बाद की यह जुदाई और भी ज्यादा तकलीफदेह थी. करीब 10 महीने तक कागजी कार्रवाई और दूतावासों के चक्कर काटने के बाद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के हस्तक्षेप से राहत मिली. रक्षा को आखिरकार 45 दिनों का विजिटर वीजा जारी हुआ।

गृह प्रवेश पर छलकीं खुशियां

जैसे ही रक्षा सुथार जोधपुर के पाल गांव स्थित अपने ससुराल पहुंचीं, वहां उत्सव जैसा माहौल हो गया. वर्षों के इंतजार के बाद अपनी बहू को घर में देख सास-ससुर की आंखों में आंसू आ गए. पाक विस्थापितों के हक की लड़ाई लड़ने वाले गणेश बिजाणी ने बताया कि अभी रक्षा विजिटर वीजा पर आई हैं, लेकिन जल्द ही उनके लिए ‘लॉन्ग टर्म वीजा’ (LTV) की प्रक्रिया शुरू की जाएगी ताकि वे स्थाई रूप से भारत में रह सकें।

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