नई दिल्ली,। जिस तरह राष्ट्रगान जन गण मन (Jana Gana Mana) के लिए सभी लोगों का खड़े होना अनिवार्य है ठीक उसी तरह राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम (Vande Matram) के लिए भी सम्मान में खड़े होना जरुरी हो जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार नए नियम बना रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में गृह मंत्रालय द्वारा आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई है।
राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत को संविधान में समान सम्मान
भारत के संविधान के अनुसार, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत दोनों को समान सम्मान प्राप्त है, लेकिन कानूनी और अनिवार्य प्रोटोकॉल के मामले में दोनों में बड़ा अंतर है। राष्ट्रगान के गायन के समय खड़ा होना अनिवार्य है और इसका अपमान करने पर राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत सजा का प्रावधान है। वहीं, राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के गायन के समय खड़े होने या किसी विशेष मुद्रा को अपनाने के लिए कोई कानूनी अनिवार्यता या लिखित नियम नहीं है।
गृह मंत्रालय की बैठक में नियमों पर चर्चा
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा है कि गृह मंत्रालय की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई है। इस दौरान राष्ट्रीय गीत के गायन के नियम और निर्देश सहित सम्मान के तरीके पर चर्चा हुई। बैठक में इन बिंदुओं पर चर्चा की गई:
- क्या वंदे मातरम को गाने के समय, स्थान और तरीके के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाने चाहिए?
- क्या इसके गायन के दौरान राष्ट्रगान की तरह खड़ा होना अनिवार्य किया जाए?
वंदे मातरम को लेकर राजनीतिक विवाद भी बढ़ा
1937 के कांग्रेस अधिवेशन के दौरान वंदे मातरम के कुछ छंदों को हटा दिया गया था। बीजेपी का आरोप है कि इसी नीति ने विभाजन की नींव रखी, जबकि कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी इतिहास को तोड़-मरोड़ रही है और पश्चिम बंगाल के आगामी चुनावों को देखते हुए इस मुद्दे को हवा दे रही है।
अदालतों में भी याचिकाएं, ‘राष्ट्रगान जैसा फ्रेमवर्क’ की मांग
पिछले कुछ वर्षों में अदालतों में कई याचिकाएं दायर की गई हैं जिनमें मांग की गई है कि वंदे मातरम के लिए भी राष्ट्रगान जैसा ही फ्रेमवर्क तैयार किया जाए। साल 2022 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि अभी तक राष्ट्रीय गीत के लिए ऐसे कोई दंडात्मक प्रावधान या निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।
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वंदे मातरम: स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे बड़ा नारा
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखित वंदे मातरम स्वदेशी आंदोलन (1905-08) के दौरान आजादी का सबसे बड़ा नारा बनकर उभरा था। अब सरकार इसे फिर से उसी गौरवशाली स्थान पर स्थापित करने की कोशिश कर रही है।
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