नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का बड़ा निर्णय: पासपोर्ट नवीनीकरण में यात्रा कार्यक्रम नहीं मांग सकता प्राधिकरण उच्चतम न्यायालय ने कहा कि देश के संवैधानिक ढांचे में स्वतंत्रता राज्य का उपहार नहीं, बल्कि उसका पहला दायित्व है।
पासपोर्ट प्राधिकरण की भूमिका सीमित
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति ए. जी. मसीह की पीठ ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट प्राधिकरण (passport authority) किसी व्यक्ति से भविष्य की यात्रा योजनाओं या वीजा की अनुसूची की मांग नहीं कर सकता। उनका दायित्व केवल यह जांचना है कि लंबित आपराधिक कार्यवाही के बावजूद संबंधित अदालत ने व्यक्ति को यात्रा की अनुमति देने का विकल्प खुला रखा है या नहीं।
संवैधानिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकार
अदालत ने कहा कि नवीनीकरण के समय संभावित या अभी अस्तित्व में ही न होने वाली यात्राओं का विवरण मांगना तर्कसंगत नहीं है। संवैधानिक ढांचे में स्वतंत्रता राज्य का उपहार नहीं, बल्कि उसका पहला दायित्व है। कानून के अधीन रहते हुए किसी नागरिक को आवागमन, यात्रा, आजीविका और अवसर प्राप्त करने की स्वतंत्रता भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।
प्रशासनिक औपचारिकताओं में अनावश्यक बाधा नहीं
शीर्ष अदालत ने रेखांकित किया कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रशासनिक औपचारिकताओं के नाम पर अनावश्यक रूप से सीमित नहीं किया जा सकता।
याचिका का विवरण: महेश कुमार अग्रवाल का मामला
यह आदेश महेश कुमार अग्रवाल (Mahesh Kumar Agarwal) की याचिका पर दिया गया। अग्रवाल झारखंड के रांची स्थित एनआईए की विशेष अदालत में यूएपीए के तहत कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले से जुड़े मामले में दोषी ठहराए जा चुके हैं और वर्तमान में मुकदमे का सामना कर रहे हैं। जमानत की शर्तों के तहत उन्होंने अपना पासपोर्ट अदालत में जमा किया हुआ था, लेकिन वर्ष 2023 में पासपोर्ट की अवधि समाप्त हो गई थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने किया कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द
अग्रवाल ने उच्चतम न्यायालय का रुख करते हुए क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, कोलकाता को पासपोर्ट नवीनीकरण का निर्देश देने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए अग्रवाल के पक्ष में फैसला सुनाया और पासपोर्ट प्राधिकरण को उनका पासपोर्ट नवीनीकृत करने का निर्देश दिया। अदालत ने दोहराया कि नवीनीकरण के स्तर पर वीजा या भविष्य की यात्रा योजनाओं की मांग करना कानूनन उचित नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट क्या है?
भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) देश का सबसे बड़ा और अंतिम अपीलीय न्यायालय है, जो संविधान की व्याख्या करता है और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है
सुप्रीम कोर्ट का पुराना नाम क्या था?
भारत में पहली बार सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना 1774 में “1773 के रेगुलेटिंग एक्ट” के तहत हुई थी । तब इसे कलकत्ता सर्वोच्च न्यायालय कहा जाता था और इसमें एक मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त 3 अन्य न्यायाधीश होते थे ।
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