कोलकाता,। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची (Voter List) के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के बीच राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने राज्य प्रशासन और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि अधिकारियों को वेरिफिकेशन प्रक्रिया में हेराफेरी करने के गैर-कानूनी आदेश दिए जा रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र को कमजोर करने वाला एक बेशर्म गठजोड़ करार दिया है।
व्हाट्सएप मैसेज का स्क्रीनशॉट किया साझा
अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक कथित व्हाट्सएप मैसेज का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए सनसनीखेज खुलासा किया। उन्होंने दावा किया कि दक्षिण 24 परगना के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) की ओर से अधिकारियों को विशेष निर्देश भेजे गए हैं। इस कथित संदेश में अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वे वेरिफिकेशन के दौरान किसी भी स्थिति में ‘नॉट वेरिफाइड’ (सत्यापित नहीं) विकल्प का चयन न करें।
रोज 3,000 वेरिफिकेशन का दबाव
अधिकारी ने बताया कि प्रशासन ने हर दिन 3,000 वेरिफिकेशन का लक्ष्य पूरा करने का दबाव बनाया है, जो प्रक्रिया की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि यह आदेश सीधे तौर पर चुनाव प्रक्रिया में हेराफेरी करने की कोशिश है।
फर्जी मतदाताओं को बचाने का आरोप
उन्होंने कहा कि अधिकारियों को जानबूझकर ‘नॉट वेरिफाइड’ मार्क करने से रोका जा रहा है, ताकि उन अयोग्य मतदाताओं और फर्जी प्रविष्टियों को मतदाता सूची से बाहर न किया जा सके, जिन्हें टीएमसी ने अपने वोटबैंक के रूप में सूची में शामिल करवाया है।
चुनाव आयोग के आदेशों की अवहेलना का दावा
सुवेंदु अधिकारी के अनुसार, ममता बनर्जी सरकार भारत के चुनाव आयोग के पारदर्शी मतदाता सूची संबंधी आदेशों को धता बताने के लिए जिला प्रशासन को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।
चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नेता प्रतिपक्ष ने भारत के चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आयोग से अनुरोध किया है कि एडीएम और उन सभी अधिकारियों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच शुरू की जाए जो इन कथित गैर-कानूनी निर्देशों को जारी करने या उनका पालन करने में संलिप्त हैं।
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दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए दोषी अधिकारियों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि चुनाव प्रक्रिया की शुचिता बनी रहे।
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