पटना । बिहार की राजनीति एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। करीब दो दशकों से राज्य की सत्ता का चेहरा रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री (CM) पद छोड़ सकते हैं। इस संभावित बदलाव ने बिहार की सियासत में हलचल बढ़ा दी है और अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नीतीश कुमार के बाद राज्य की कमान किसके हाथ में जाएगी।
दो दशक पुराना सत्ता समीकरण बदलने के संकेत
साल 2005 से बिहार की राजनीति में भाजपा और जदयू के बीच एक तय व्यवस्था देखने को मिलती रही है। इस फॉर्मूले के तहत मुख्यमंत्री पद हमेशा जदयू के पास रहा, जबकि भाजपा को उपमुख्यमंत्री पद दिया जाता रहा। 2005 से 2013 तक भाजपा का एक उपमुख्यमंत्री होता था, लेकिन 2017 के बाद पार्टी ने दो उपमुख्यमंत्री बनाने का मॉडल अपनाया।
मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए माना जा रहा है कि इस बार यह समीकरण बदल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा अब मुख्यमंत्री पद अपने पास रखने की रणनीति बना सकती है, जबकि जदयू को सत्ता में सहयोगी भूमिका निभानी पड़ सकती है।
भाजपा के भीतर नए नेतृत्व की तलाश
नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे की चर्चा के साथ ही भाजपा के भीतर नए मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर मंथन तेज हो गया है। पार्टी नेतृत्व आमतौर पर अंतिम समय में चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए जाना जाता है, लेकिन फिलहाल कुछ नाम ऐसे हैं जिनकी चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है।
सीएम पद की दौड़ में ये प्रमुख चेहरे
राजनीतिक गलियारों में जिन नेताओं को संभावित दावेदार माना जा रहा है, उनमें कई बड़े और प्रभावशाली नाम शामिल हैं।
- नित्यानंद राय – केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और केंद्रीय नेतृत्व के बेहद करीबी माने जाते हैं।
- सम्राट चौधरी – वर्तमान उपमुख्यमंत्री और राज्य की राजनीति में मजबूत ओबीसी चेहरा।
- विजय सिन्हा – उपमुख्यमंत्री और संगठन तथा प्रशासन दोनों में अनुभव रखने वाले नेता।
- दिलीप जायसवाल – राज्य सरकार में प्रभावशाली मंत्री और संगठन में अच्छी पकड़।
- संजय चौरसिया – वरिष्ठ विधायक, जिनकी पहचान संगठन के मजबूत नेता के रूप में होती है।
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अंतिम फैसला भाजपा नेतृत्व के हाथ में
हालांकि इन नामों पर चर्चा तेज है, लेकिन अंतिम निर्णय भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा ही लिया जाएगा। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो बिहार में नेतृत्व परिवर्तन लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है।
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