मोतिहारी। देश में प्रस्तावित राष्ट्रीय जनगणना 2027 को लेकर बिहार में तैयारियां तेज हो गई हैं। पूर्वी चंपारण जिले में इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस (Digital and Paperless) तरीके से कराई जाएगी। इस बड़े अभियान को सफल बनाने के लिए 13,595 अधिकारी और कर्मचारियों की तैनाती की जा रही है। पहली बार पारंपरिक कागजी प्रक्रिया की जगह मोबाइल ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (Online Platform) के जरिए आंकड़े जुटाए जाएंगे।
पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना प्रक्रिया
अधिकारियों के अनुसार, यह जनगणना भारत के इतिहास में पहली बार पूरी तरह डिजिटल तकनीक पर आधारित होगी। इसमें मोबाइल ऐप, ऑनलाइन डेटा एंट्री और क्लाउड सिस्टम (Data Entry and Cloud System) का उपयोग किया जाएगा। इससे डेटा संग्रहण की प्रक्रिया तेज होने के साथ-साथ पारदर्शिता और सटीकता भी सुनिश्चित होगी।
दो चरणों में पूरा होगा अभियान
जनगणना का कार्य दो चरणों में संपन्न किया जाएगा। पहले चरण में वर्ष 2026 में मकान सूचीकरण और हाउसिंग सर्वे किया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में 2027 में जनसंख्या से संबंधित विस्तृत आंकड़े एकत्र किए जाएंगे। प्रथम चरण 2 मई 2026 से 31 मई 2026 के बीच चलाया जाएगा, जिसमें हर घर की बुनियादी जानकारी दर्ज की जाएगी।
सेल्फ-एन्यूमरेशन की भी मिलेगी सुविधा
इस बार नागरिकों को सेल्फ-एन्यूमरेशन (स्व-गणना) की सुविधा भी दी जाएगी। लोग खुद ही मोबाइल या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इससे लोगों की भागीदारी बढ़ेगी और प्रक्रिया और अधिक आसान हो जाएगी।
जीआईएस और रियल-टाइम मॉनिटरिंग से बढ़ेगी सटीकता
इस जनगणना में जीआईएस मैपिंग, रियल-टाइम डेटा मॉनिटरिंग और क्लाउड-आधारित सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे आंकड़ों में त्रुटियों की संभावना कम होगी और डेटा ज्यादा विश्वसनीय बनेगा।
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घर-घर से जुटाई जाएंगी 33 तरह की जानकारियां
पहले चरण के दौरान मकानों से जुड़ी विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। इसमें भवन संख्या, मकान की संरचना (छत, दीवार, फर्श), उपयोग की स्थिति, परिवार के सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम और लिंग, स्वामित्व की स्थिति, कमरों की संख्या, विवाहित जोड़ों की संख्या, पानी और बिजली के स्रोत, शौचालय और स्नानघर की सुविधा, रसोई और गैस कनेक्शन, टीवी, इंटरनेट, मोबाइल, वाहन और आय के स्रोत समेत कुल 33 प्रकार की सूचनाएं दर्ज की जाएंगी।
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