क्या सेमीफाइनल के ‘चक्रव्यूह’ को भेद पाएगा भारत?
स्पोर्ट्स डेस्क: मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम भारतीय क्रिकेट के सुनहरे इतिहास(Grand Finale) का गवाह रहा है, जहाँ भारत ने 2011 में विश्व कप जीता था। मात्र 13 महीने में बनकर तैयार हुआ यह मैदान अपनी ‘बैटिंग पैराडाइज’ पिच के लिए मशहूर(Famous) है, जहाँ टी-20 का औसत स्कोर 174 रन है। हालाँकि, यह पिच तेज गेंदबाजों के लिए भी मददगार रही है, जिन्होंने यहाँ 116 विकेट चटकाए हैं। रात के मैचों में यहाँ ‘ड्यू’ (ओस) की भूमिका अहम होती है, जिससे रन चेज करना थोड़ा आसान हो जाता है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि पहले बल्लेबाजी(Batting) और लक्ष्य का पीछा करने वाली टीमों के बीच जीत का अंतर 8-8 की बराबरी पर है।
सेमीफाइनल का दबाव और टीम इंडिया का रिकॉर्ड
भारत ने वानखेड़े में 71% टी-20 मैच जीते हैं, लेकिन जब बात मल्टिनेशन टूर्नामेंट के सेमीफाइनल की आती है, तो रिकॉर्ड चिंताजनक रहा है। टीम इंडिया(Grand Finale) ने यहाँ खेले गए 4 महत्वपूर्ण सेमीफाइनल मैचों में से केवल 1 (2023 वनडे वर्ल्ड कप बनाम न्यूजीलैंड) जीता है। इंग्लैंड के खिलाफ भी वानखेड़े में भारत का पलड़ा बराबरी (6-6 जीत) का रहा है। 1987 के वनडे वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में इसी मैदान पर इंग्लैंड ने भारत को हराया था, जिसका बदला लेने के इरादे से रोहित ब्रिगेड 5 मार्च को मैदान पर उतरेगी।
अन्य पढ़े: एशियाई खेलों में गोल्ड पर निशाना साधेंगी अंकिता भकत
खिलाड़ियों का प्रदर्शन और ऐतिहासिक आंकड़े
इंग्लैंड की टीम भले ही यहाँ 2025 में 97 रन पर सिमट गई थी, लेकिन उनके नाम इसी मैदान पर टी-20 वर्ल्ड कप इतिहास का सबसे बड़ा(Grand Finale) रन चेज (230 रन बनाम दक्षिण अफ्रीका) करने का रिकॉर्ड दर्ज है। व्यक्तिगत प्रदर्शन की बात करें तो भारत के अभिषेक शर्मा यहाँ के ‘किंग’ हैं, जिन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ ही 135 रनों की आक्रामक पारी खेली थी। गेंदबाजों में पेसर्स का दबदबा रहने की उम्मीद है, क्योंकि शुरुआती ओवरों में लाल मिट्टी वाली यह पिच स्विंग और उछाल प्रदान करती है।
वानखेड़े स्टेडियम में टॉस जीतकर पहले क्या करना फायदेमंद हो सकता है?
वानखेड़े में शाम के समय होने वाले मैचों में ‘ओस'(Grand Finale) के कारण बाद में गेंदबाजी करना मुश्किल होता है, इसलिए टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी करना पसंद कर सकती है। हालांकि, बड़े मैचों (सेमीफाइनल) के दबाव को देखते हुए पहले बल्लेबाजी कर 200+ का स्कोर बनाना भी एक सुरक्षित रणनीति हो सकती है।
इंग्लैंड का वानखेड़े स्टेडियम में सबसे बड़ा रिकॉर्ड क्या है?
इंग्लैंड के नाम वानखेड़े में टी-20 वर्ल्ड कप इतिहास का सबसे बड़ा रन चेज दर्ज है। 2016 में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 230 रनों के विशाल लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल किया था।
अन्य पढ़े: