ऑस्ट्रेलिया ने दी 5 खिलाड़ियों को शरण
स्पोर्ट्स डेस्क: एशियन कप के दौरान दक्षिण कोरिया के खिलाफ मैच से पहले ईरानी(Irani) महिला टीम ने अपना राष्ट्रगान नहीं गाया था। इस विरोध प्रदर्शन के बाद ईरान में कट्टरपंथी समूहों(Radical Groups) ने टीम की कड़ी आलोचना की और उन्हें सख्त सजा देने की मांग उठाई। अपनी सुरक्षा और भविष्य को खतरे में देखते हुए, टीम की पांच खिलाड़ियों ने वापस ईरान लौटने के बजाय ऑस्ट्रेलिया में शरण मांगने का फैसला किया। ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री टोनी बर्क ने पुष्टि की है कि इन खिलाड़ियों को संघीय पुलिस की सुरक्षा में एक गोपनीय स्थान पर पहुँचा दिया गया है।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार का रुख: मानवीय वीजा और भविष्य की सुरक्षा
ऑस्ट्रेलिया(Australia) के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि इन पांचों खिलाड़ियों को मानवीय वीजा प्रदान कर दिया गया है। इस विशेष वीजा के तहत, ये खिलाड़ी अब ऑस्ट्रेलिया में स्थायी रूप(Irani) से रह सकती हैं, उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकती हैं और वहाँ रोजगार भी कर सकती हैं। गृह मंत्री बर्क ने इन महिलाओं के साथ तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते समय उनके चेहरों पर राहत और खुशी साफ झलक रही थी। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी इन खिलाड़ियों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया था।
अन्य पढ़े: गंभीर की रणनीति हिट- शोएब अख्तर की तारीफ
शेष टीम की दुविधा: परिवार और सुरक्षा की चिंता
ईरानी दल में कुल 26 खिलाड़ी और स्टाफ शामिल थे। फिलहाल केवल पांच खिलाड़ियों ने ही शरण ली है, जबकि बाकी सदस्य अभी भी अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता में हैं। सबसे बड़ी चुनौती खिलाड़ियों के परिवारों की सुरक्षा है जो अभी भी ईरान(Irani) में रह रहे हैं। उन्हें डर है कि उनके किसी भी कदम का खामियाजा उनके परिजनों को भुगतना पड़ सकता है। यह घटना न केवल खेल जगत बल्कि वैश्विक मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से भी एक मिसाल बन गई है, जो यह दर्शाती है कि खिलाड़ी किस प्रकार अपनी आवाज उठाने के लिए बड़े बलिदान दे रहे हैं।
ऑस्ट्रेलियाई ‘मानवीय वीजा’ मिलने के बाद अब इन खिलाड़ियों को क्या अधिकार मिलेंगे?
इस वीजा के तहत इन पांचों महिला खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया में सुरक्षित रहने, कानूनी रूप से काम करने और अपनी शिक्षा जारी रखने का पूरा अधिकार मिलेगा। यह उन्हें एक नई पहचान और सुरक्षा प्रदान करता है ताकि वे बिना किसी सरकारी दमन के डर के अपना जीवन और खेल करियर फिर से शुरू कर सकें।
ईरान की महिला टीम द्वारा राष्ट्रगान न गाने के पीछे क्या संदेश था?
राष्ट्रगान न गाना अक्सर अपने देश की सरकारी नीतियों या मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ एक मौन लेकिन शक्तिशाली विरोध का प्रतीक होता है। खिलाड़ियों ने इस माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी असहमति जताई, जिसके कारण उन्हें अपने देश लौटने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई या सजा का डर सताने लगा था।
अन्य पढ़े: