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Yuvraj: युवराज सिंह का बड़ा खुलासा: “सम्मान की कमी ने मजबूर किया संन्यास के लिए”

Author Icon By Dhanarekha
Updated: January 29, 2026 • 3:18 PM
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मैच-विनर की अनसुनी टीस

स्पोर्ट्स डेस्क: भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडर्स(All Rounders) में से एक, युवराज सिंह(Yuvraj) ने हाल ही में एक इंटरव्यू में अपने संन्यास के पीछे के असली कारणों पर चर्चा की। युवराज ने स्पष्ट किया कि 2019 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट(International Cricket) को अलविदा कहने का फैसला केवल फॉर्म की वजह से नहीं, बल्कि मैनेजमेंट और बोर्ड की ओर से सम्मान की कमी के कारण लिया गया था। 2011 विश्व कप के नायक, जिन्होंने कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को हराकर मैदान पर वापसी की थी, उन्हें लगा कि उनके करियर के अंतिम पड़ाव पर उनके साथ वैसा व्यवहार नहीं किया गया जिसके वे हकदार थे

यो-यो टेस्ट और चयन की राजनीति

युवराज(Yuvraj) ने उन परिस्थितियों का भी जिक्र किया जब उन्हें टीम से बाहर रखने के लिए ‘यो-यो टेस्ट’ का सहारा लिया गया था। उनके अनुसार, जब उन्होंने फिटनेस टेस्ट पास कर लिया, तब भी उन्हें नजरअंदाज किया गया। युवराज ने कहा कि एक सीनियर खिलाड़ी के रूप में वे केवल स्पष्टता और थोड़े सम्मान की उम्मीद कर रहे थे। बीसीसीआई और तत्कालीन टीम प्रबंधन के साथ उनके खराब होते रिश्तों ने उन्हें यह महसूस कराया कि अब मैदान छोड़ने का सही समय है, क्योंकि क्रिकेट से उनका लगाव उस ‘सिस्टम’ की वजह से कम होने लगा था।

विरासत और भविष्य के खिलाड़ियों को संदेश

संन्यास के वर्षों बाद युवराज का यह बयान भारतीय क्रिकेट(Yuvraj) के ‘एग्जिट प्रोटोकॉल’ पर सवाल उठाता है। युवराज ने जोर देकर कहा कि खिलाड़ियों को केवल उनके आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि उनके योगदान के आधार पर विदा किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि भविष्य के स्टार्स को ऐसी मानसिक स्थिति से न गुजरना पड़े, इसके लिए बोर्ड को एक पारदर्शी संवाद प्रक्रिया बनानी चाहिए। युवराज आज भी ग्लोबल लीग्स में खेल रहे हैं, लेकिन उनकी यह टीस करोड़ों फैंस को भावुक कर रही है।

युवराज सिंह ने अपने संन्यास के लिए मुख्य रूप से किसे जिम्मेदार ठहराया है?

उन्होंने(Yuvraj) सीधे तौर पर किसी एक व्यक्ति का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उन्होंने तत्कालीन टीम मैनेजमेंट और चयन प्रक्रिया की ओर इशारा किया है। उनका मानना है कि उन्हें टीम से बाहर करने के लिए फिटनेस मापदंडों को हथियार बनाया गया और एक दिग्गज खिलाड़ी को जो विदाई या संवाद मिलना चाहिए था, उसकी भारी कमी थी।

युवराज सिंह के क्रिकेट करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियां क्या रही हैं?

युवराज सिंह को ‘सिक्सर किंग’ के रूप में जाना जाता है। उन्होंने 2007 टी-20 वर्ल्ड कप में एक ओवर में 6 छक्के जड़े थे और भारत को खिताब जिताया था। इसके अलावा, 2011 वनडे वर्ल्ड कप में वे ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ रहे थे। उन्होंने भारत को दो विश्व कप जिताने में सबसे अहम भूमिका निभाई है।

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