हैदराबाद। सोसायटी फॉर साइबराबाद सिक्योरिटी काउंसिल (SCSC) द्वारा आयोजित “कॉफी विद ए कॉप” कार्यक्रम की दूसरी कड़ी में युवाओं के साथ मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक संतुलन पर खुलकर चर्चा की गई। इस सत्र की मेजबानी रश्मि श्रीवास्तव ने की। कार्यक्रम का उद्देश्य 16 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को बिना किसी झिझक के अपने विचार, अनुभव और भावनाएं साझा करने के लिए सुरक्षित मंच प्रदान करना था। कार्यक्रम में के. सृजना (K. Srijana) ने मानसिक दृढ़ता, भावनात्मक संतुलन और तनाव प्रबंधन पर विचार साझा किए।
“मेंटल वेलनेस बिगिन्स विद कन्वर्सेशन” थीम पर दूसरी कड़ी आयोजित
उन्होंने कहा कि पेशेवर जीवन के दबाव के साथ-साथ पारिवारिक संबंधों को संतुलित रखना भी आवश्यक है। सत्र के दौरान “रेड फ्लैग/ग्रीन फ्लैग” चर्चा और वेलनेस आधारित गतिविधियों ने प्रतिभागियों को सक्रिय रूप से जोड़कर रखा। कार्यक्रम के अंत में युवाओं ने प्रेरणादायक गीत गाकर सकारात्मकता और आशा का संदेश दिया। कार्यक्रम में बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बातचीत ही बेहतर जीवन की दिशा में पहला कदम है।
मानसिक बीमारी के 5 लक्षण क्या हैं?
व्यवहार, सोच और भावनाओं में लंबे समय तक असामान्य बदलाव मानसिक स्वास्थ्य समस्या के संकेत हो सकते हैं। लगातार उदासी, अत्यधिक चिंता, नींद में परेशानी, लोगों से दूरी बनाना और गुस्सा या चिड़चिड़ापन सामान्य लक्षणों में शामिल माने जाते हैं। ध्यान लगाने में कठिनाई और रोजमर्रा के कामों में रुचि कम होना भी देखा जा सकता है। हर व्यक्ति में लक्षण अलग हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी माना जाता है।
मानसिक बीमारी का सबसे अच्छा इलाज क्या है?
उपचार व्यक्ति की स्थिति और बीमारी के प्रकार पर निर्भर करता है। डॉक्टर की सलाह, काउंसलिंग, मनोचिकित्सा और जरूरत पड़ने पर दवाइयों का उपयोग किया जा सकता है। नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद और परिवार का सहयोग भी सुधार में मदद करता है। समय पर इलाज और मानसिक समर्थन को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी भी दवा का उपयोग डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।
मानसिक स्वास्थ्य को कैसे ठीक करें?
संतुलित जीवनशैली मानसिक स्वास्थ्य सुधारने में सहायक मानी जाती है। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, पौष्टिक भोजन और तनाव कम करने वाली गतिविधियां लाभदायक हो सकती हैं। परिवार और दोस्तों से बातचीत करना तथा अकेलेपन से बचना भी मदद करता है। जरूरत महसूस होने पर मनोवैज्ञानिक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना उपयोगी माना जाता है। योग और ध्यान जैसी गतिविधियां भी मानसिक शांति बढ़ाने में सहायक हो सकती हैं।
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