कई जिलों में 24 मामलों में शामिल आरोपी गिरफ्तार, गहने पीड़ितों को सौंपे गए
हैदराबाद। अमीनपुर पुलिस स्टेशन ने लगातार चोरी की घटनाओं में शामिल एक कुख्यात आरोपी को गिरफ्तार कर उसके पास से चोरी किए गए लगभग 45 तोले सोने के आभूषण बरामद किए हैं। गिरफ्तार (arrest) आरोपी की पहचान मंडल्ला शिवा उर्फ एर्रा शिवा (32 वर्ष), निवासी भूपेश गुप्ता कॉलोनी, मीरपेट, हैदराबाद के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार आरोपी मूल रूप से नागरकुर्नूल जिले का रहने वाला है और मजदूरी का काम करता था। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी नशे और ऐशो-आराम की आदतों के कारण चोरी की वारदातों (Incidents) में शामिल हो गया। उसके खिलाफ मलकाजगिरी, साइबराबाद और नागरकुर्नूल जिलों में कुल 24 मामले दर्ज हैं।
आरोपी पहले भी जेल जा चुका
अधिकारियों के अनुसार आरोपी पहले भी जेल जा चुका है और जमानत पर बाहर आने के बाद फिर से चोरी की घटनाओं को अंजाम दे रहा था। इस साल अप्रैल में आरोपी ने अमेंपुर और बंधमकोम्मु क्षेत्रों में रात के समय बंद घरों में घुसकर ताले तोड़कर सोने-हीरे के आभूषण चोरी किए थे। जांच में यह भी पुष्टि हुई कि उसने अमेंपुर क्षेत्र में तीन चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया। पुलिस ने आरोपी को 16 मई 2026 को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। बाद में कोर्ट की अनुमति से बरामद किए गए गहने पीड़ित दंपति वैंकटरमण और भवानी को एसीपी सी. वाई. श्रीनिवास कुमार की उपस्थिति में वापस सौंप दिए गए। अमीनपुर पुलिस ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
पुलिस के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा सकती है?
यदि किसी पुलिसकर्मी पर गलत व्यवहार, भ्रष्टाचार या अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप हो, तो संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, पुलिस शिकायत प्राधिकरण या मानवाधिकार आयोग में शिकायत की जा सकती है। गंभीर मामलों में न्यायालय का सहारा भी लिया जा सकता है। शिकायत लिखित रूप में, ऑनलाइन पोर्टल या हेल्पलाइन के माध्यम से दर्ज कराई जा सकती है। जांच के बाद विभागीय कार्रवाई या कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
पुलिस को कौन सस्पेंड कर सकता है?
पुलिसकर्मी को निलंबित करने का अधिकार आमतौर पर उसके विभाग के वरिष्ठ अधिकारी या राज्य सरकार के पास होता है। यह कार्रवाई अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार, कर्तव्य में लापरवाही या गंभीर शिकायतों के मामलों में की जा सकती है। विभागीय जांच के दौरान निलंबन अस्थायी कदम के रूप में लिया जाता है। अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट और नियमों के अनुसार किया जाता है।
पुलिस बदतमीजी करे तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में शांत रहकर घटना की जानकारी नोट करना और संभव हो तो सबूत सुरक्षित रखना उपयोगी माना जाता है। संबंधित थाना प्रभारी, एसपी, डीजीपी कार्यालय या पुलिस शिकायत प्राधिकरण में शिकायत की जा सकती है। कई राज्यों में ऑनलाइन शिकायत पोर्टल और हेल्पलाइन भी उपलब्ध हैं। गंभीर मामलों में मानवाधिकार आयोग या अदालत से भी मदद ली जा सकती है। अपने अधिकारों की जानकारी रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
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