हैदराबाद। हैदराबाद में वरिष्ठ स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने शहरी आबादी में उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) के बढ़ते मामलों पर गंभीर चिंता जताई है। डॉक्टरों (Doctors) के अनुसार शहर में लगभग हर तीन में से एक वयस्क उच्च रक्तचाप से पीड़ित है। विश्व हाइपरटेंशन सप्ताह (18 से 25 मई) के अवसर पर “साथ मिलकर हाइपरटेंशन को नियंत्रित करें: नियमित रूप से रक्तचाप जांचें और साइलेंट किलर को हराएं” थीम के तहत विशेषज्ञों ने नियमित जांच, स्वस्थ जीवनशैली और समय पर उपचार की आवश्यकता पर जोर दिया। चिकित्सकों ने बताया कि आधे से अधिक मरीजों (Patients) को अपनी स्थिति की जानकारी ही नहीं होती, क्योंकि शुरुआती चरण में लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते।
डॉक्टरों ने जताई गंभीर चिंता कहा, “साइलेंट किलर”
डॉ. सी.एच. वसंत कुमार ने कहा कि इंडियन सोसाइटी ऑफ हाइपरटेंशन हृदय रोगों को कम करने के लिए जागरूकता, अनुसंधान और मानकीकृत उपचार दिशानिर्देशों पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच बेहद जरूरी है क्योंकि बीमारी अक्सर गंभीर अवस्था में पहुंचने तक पता नहीं चलती। डॉ. लिली रोड्रिग्स ने बताया कि समुदाय स्तर पर स्क्रीनिंग कार्यक्रमों को मजबूत किया जा रहा है और तेलंगाना में निवारक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर काम चल रहा है। डॉ. उदय लाल ने कहा कि कार्यस्थल का तनाव, अस्वस्थ खानपान और शारीरिक निष्क्रियता शहरी आबादी में बढ़ते रक्तचाप के प्रमुख कारण हैं। डॉ. मोहम्मद रियाज ने युवाओं में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए कहा कि अब कम उम्र में भी हृदय संबंधी समस्याएं देखी जा रही हैं।
महिलाओं में बढ़ जाता है उच्च रक्तचाप का खतरा
महिलाओं के स्वास्थ्य पर बोलते हुए डॉ. एल. शेषा सैलजा ने कहा कि रजोनिवृत्ति के बाद हार्मोनल बदलावों के कारण महिलाओं में उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए नियमित जांच आवश्यक है। डॉ. श्रीरंग अबकारी ने डिजिटल ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग और घर पर नियमित जांच को शुरुआती पहचान के लिए महत्वपूर्ण बताया। विशेषज्ञों ने बताया कि सामान्यतः 140/90 mmHg या उससे अधिक रक्तचाप को हाइपरटेंशन माना जाता है, जबकि 120/80 mmHg से अधिक रीडिंग को चेतावनी संकेत माना जाना चाहिए। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि अनुपचारित उच्च रक्तचाप से हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी रोग, दृष्टि हानि और हृदय विफलता जैसी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। उन्होंने इसे “साइलेंट किलर” बताते हुए लोगों से अपील की कि वे वर्ष में कम से कम एक बार रक्तचाप की जांच जरूर कराएं, और जोखिम वाले लोगों (जैसे मोटापा, मधुमेह, तनाव और निष्क्रिय जीवनशैली) को अधिक बार जांच करानी चाहिए।
हाई बीपी को तुरंत कंट्रोल में कैसे लाएं?
रक्तचाप बढ़ने पर सबसे पहले शांत स्थान पर बैठकर आराम करना चाहिए। गहरी और धीमी सांस लेने से तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। नमक, चाय, कॉफी और धूम्रपान से तुरंत बचना बेहतर माना जाता है। पर्याप्त पानी पीना और शरीर को आराम देना भी उपयोगी हो सकता है। यदि डॉक्टर ने पहले से दवा दी है, तो उसे निर्धारित मात्रा में लेना चाहिए। तेज सिरदर्द, सीने में दर्द या सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी माना जाता है।
अगर मेरा बीपी 150-90 है तो क्या होगा?
यह स्तर सामान्य से अधिक माना जाता है और उच्च रक्तचाप की श्रेणी में आ सकता है। लगातार ऐसा रहने पर हृदय, किडनी और रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ सकता है। कई लोगों में शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते, इसलिए नियमित जांच जरूरी मानी जाती है। तनाव, अधिक नमक, मोटापा और कम शारीरिक गतिविधि इसके कारण हो सकते हैं। जीवनशैली में सुधार और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार लेने से इसे नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
BP की सबसे अच्छी दवा कौन सी है?
उच्च रक्तचाप की दवा व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और अन्य बीमारियों के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं। आमतौर पर एसीई इनहिबिटर, बीटा ब्लॉकर, कैल्शियम चैनल ब्लॉकर और डाययूरेटिक जैसी दवाएं उपयोग की जाती हैं। हर व्यक्ति के लिए एक ही दवा उपयुक्त नहीं होती। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा शुरू करना या बंद करना नुकसानदायक हो सकता है। सही इलाज के लिए नियमित जांच और चिकित्सकीय परामर्श जरूरी माना जाता है।
तुरंत बीपी लो करने के लिए क्या करें?
रक्तचाप अधिक महसूस होने पर तनाव कम करना और शरीर को आराम देना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। धीरे-धीरे गहरी सांस लेना, शांत वातावरण में बैठना और अधिक नमक वाले भोजन से बचना मददगार हो सकता है। पर्याप्त पानी पीना और कैफीन या धूम्रपान से दूरी रखना भी उपयोगी माना जाता है। यदि पहले से डॉक्टर द्वारा दवा दी गई है, तो उसे समय पर लेना चाहिए। चक्कर, सीने में दर्द या धुंधला दिखाई देने जैसे लक्षण होने पर तुरंत अस्पताल जाना जरूरी होता है।
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