Hyderabad : नक्सलवाद ने लगभग तीन पीढ़ियों तक देश को प्रभावित किया – अमित शाह

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अमित शाह
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जगदलपुर / हैदराबाद। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) ने देश से वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) को समाप्त करने के केंद्र सरकार के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि सरकार एक नक्सल-मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इस उद्देश्य के तहत सोमवार को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में उन पुलिस अधिकारियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने नक्सली गतिविधियों के खिलाफ निर्णायक भूमिका निभाई। इस अवसर पर तेलंगाना पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने राज्य को नक्सल-मुक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सम्मानित किए गए अधिकारियों में डीजीपी (DGP) सी. वी. आनंद, राज्य सुरक्षा सलाहकार बी. शिवधार रेड्डी, डीजीपी ऑपरेशंस (आक्टोपस एवं ग्रेहाउंड्स) डॉ. अनिल कुमार तथा मल्काजगिरी पुलिस आयुक्त एवं पूर्व एसआईबी आईजी सुमति और उनकी एसआईबी टीम शामिल रही।

बस्तर क्षेत्र को नक्सल-मुक्त घोषित किया जाना देश की लंबी लड़ाई में एक ऐतिहासिक उपलब्धि

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि जनवरी 2024 की समीक्षा बैठक में देश से नक्सलवाद समाप्त करने के लिए 31 मार्च 2026 की समयसीमा तय की गई थी। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य कठिन माना जा रहा था, लेकिन रणनीति और समन्वित प्रयासों से इसे हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र को नक्सल-मुक्त घोषित किया जाना देश की लंबी लड़ाई में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

शाह ने कहा कि नक्सलवाद ने लगभग तीन पीढ़ियों तक देश को प्रभावित किया, जिससे कई क्षेत्रों में विकास बाधित हुआ और युवाओं का भविष्य अनिश्चित रहा। उन्होंने यह भी कहा कि देश के लगभग हर राज्य के सुरक्षाकर्मियों ने इस संघर्ष में सर्वोच्च बलिदान दिया है। गृह मंत्री ने कहा कि यह सफलता सुरक्षा बलों और सरकारों के संयुक्त प्रयासों, दृढ़ संकल्प और समर्पण का परिणाम है। कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

भारत में नक्सलियों की संख्या कितनी है?

सक्रिय नक्सलियों की सटीक संख्या समय-समय पर बदलती रहती है और इसका आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक रूप से निश्चित रूप में जारी नहीं किया जाता। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में नक्सली गतिविधियों और सक्रिय सदस्यों की संख्या में कमी आई है। सरकार द्वारा चलाए गए सुरक्षा अभियानों और विकास योजनाओं का असर कई प्रभावित क्षेत्रों में देखा गया है। वर्तमान में कुछ राज्यों के जंगल और दूरदराज इलाके अब भी नक्सल प्रभावित माने जाते हैं।

नक्सलियों की मुख्य मांग क्या है?

सशस्त्र आंदोलन से जुड़े इन समूहों की मांगें आमतौर पर भूमि अधिकार, आदिवासी हित, संसाधनों पर स्थानीय नियंत्रण और सामाजिक समानता से जुड़ी बताई जाती हैं। कई संगठन ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में सरकारी नीतियों का विरोध करते रहे हैं। हालांकि, हिंसक गतिविधियों और सुरक्षा बलों पर हमलों के कारण सरकार इन्हें आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती मानती है। विकास, शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे भी इनके आंदोलन में अक्सर उठाए जाते रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में कितने नक्सली जिले हैं?

बस्तर संभाग और आसपास के कई जिले लंबे समय से नक्सल प्रभावित माने जाते हैं। समय के साथ सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में अब भी गतिविधियां देखी जाती हैं। सरकार और सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित जिलों की सूची समय-समय पर अपडेट करती रहती हैं। दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर जैसे इलाके पहले प्रमुख प्रभावित क्षेत्रों में गिने जाते रहे हैं। विकास कार्यों और सुरक्षा अभियानों के कारण कई जिलों में स्थिति पहले से बेहतर बताई जाती है।

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Ajay Kumar Shukla

लेखक परिचय

Ajay Kumar Shukla

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