हैदराबाद। तेजी से बदलते डिजिटल दौर में भी आकाशवाणी समाचार प्रसारण (News broadcast) में अपनी अलग पहचान और विश्वसनीयता बनाए हुए है। यह बात आकाशवाणी के महानिदेशक राजीव कुमार जैन ने कही। हैदराबाद के कावाड़ीगुड़ा स्थित सीजीओ टावर्स में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि पारंपरिक रेडियो प्रसारण के साथ-साथ आकाशवाणी सामाजिक माध्यमों पर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही है। उन्होंने बताया कि संस्थान अपने संवाददाताओं को समय-समय पर प्रशिक्षण देकर उनकी पेशेवर दक्षता बढ़ाता है। आज के दौर में त्वरित समाचार प्रसारण की प्रतिस्पर्धा के बावजूद सत्यता और विश्वसनीयता (Reliability) बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।
प्रसारण से पहले तथ्यों की पुष्टि अवश्य करनी चाहिए
संवाददाताओं को खबरों के प्रसारण से पहले तथ्यों की पुष्टि अवश्य करनी चाहिए। इस अवसर पर तेलंगाना मीडिया अकादमी के अध्यक्ष श्रीनिवास रेड्डी ने कहा कि तकनीकी बदलावों के कारण समाचारों का स्वरूप बदल गया है, लेकिन सरकारी संस्थान होने के नाते आकाशवाणी को सटीकता और निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए। वहीं प्रेस सूचना ब्यूरो की अतिरिक्त महानिदेशक श्रुति पाटिल ने भ्रामक खबरों के बढ़ते खतरे को लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता बताई। उन्होंने महामारी के दौरान शुरू किए गए तथ्य-जांच तंत्र का भी उल्लेख किया।
विश्वसनीयता, समग्रता और निष्पक्षता का प्रतीक है आकाशवाणी
कार्यक्रम में अधिकारियों ने कहा कि आकाशवाणी विश्वसनीयता, समग्रता और निष्पक्षता का प्रतीक है। नई तकनीकों को अपनाते हुए इसकी प्रतिष्ठा को बनाए रखना आवश्यक है। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकारों और विशेषज्ञों ने बदलते मीडिया परिवेश, समाचार संकलन, सामग्री निर्माण और तथ्य-जांच जैसे विषयों पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बदलते समय के अनुरूप संवाददाताओं को नई दिशा और आवश्यक कौशल प्रदान करने में उपयोगी साबित हुआ।
डिजिटल का मतलब क्या होता है?
सामान्य रूप से अर्थ ऐसी तकनीक से है जो जानकारी को अंकों (0 और 1) के रूप में प्रोसेस करती है। इसमें कंप्यूटर, मोबाइल, इंटरनेट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस शामिल होते हैं। इस प्रणाली के जरिए डेटा को तेजी से संग्रहित, साझा और उपयोग किया जाता है। आधुनिक समय में लगभग हर क्षेत्र—शिक्षा, बैंकिंग, संचार—में इसका उपयोग बढ़ता जा रहा है, जिससे काम आसान और तेज हो गया है।
डिजिटल इंडिया का मतलब क्या होता है?
यह भारत सरकार की एक पहल है, जिसका उद्देश्य देश को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना और सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराना है। इसके तहत इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाना, सरकारी सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना और नागरिकों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना शामिल है। इससे पारदर्शिता बढ़ती है और लोगों को घर बैठे सुविधाएं मिलती हैं, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होती है।
डिजिटल मार्केटिंग की सैलरी कितनी होती है?
इस क्षेत्र में आय अनुभव, कौशल और कंपनी पर निर्भर करती है। शुरुआती स्तर पर लगभग ₹15,000 से ₹30,000 प्रति माह मिल सकते हैं। 2–5 साल के अनुभव के बाद यह ₹40,000 से ₹80,000 तक पहुंच सकती है। वहीं विशेषज्ञ या मैनेजर स्तर पर ₹1 लाख या उससे अधिक मासिक वेतन भी संभव है। फ्रीलांसिंग और खुद का काम करने पर कमाई और ज्यादा बढ़ सकती है।
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