DCC : हज यात्रियों से भारत में शांति और सद्भाव की दुआ करने की अपील

Read Time:  1 min
हज यात्रियों
हज यात्रियों
FONT SIZE
GET APP

हैदराबाद। हैदराबाद डिस्ट्रीक्ट कांग्रेस कमेटी (DCC) अध्यक्ष सैयद खालिद सैफुल्लाह ने मंगलवार को हज यात्रियों से भारत में शांति, एकता और साम्प्रदायिक सौहार्द की दुआ करने की अपील की। यह कार्यक्रम हज हाउस में आयोजित किया गया, जहां हज यात्रियों को उनके पवित्र यात्रा के लिए रवाना किया जा रहा था। इस अवसर पर उन्होंने हज यात्रियों (हुज्जाज-ए-किराम) को शुभकामनाएं दीं और कहा कि वे अल्लाह के विशेष अतिथि (special guest) के रूप में इस पवित्र यात्रा पर जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में करोड़ों मुसलमान हैं, लेकिन हर वर्ष केवल कुछ लाख लोगों को ही हज का अवसर मिलता है, इसलिए यह यात्रा अत्यंत सौभाग्यपूर्ण है। इस्लामी शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मक्का स्थित मस्जिद-ए-हरम में की गई दुआओं का विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है।

सच्चे मन से हज करने वाला व्यक्ति पवित्र होकर लौटता है

उन्होंने एक हदीस का हवाला देते हुए कहा कि सच्चे मन से हज करने वाला व्यक्ति पापों से मुक्त होकर नवजात शिशु की तरह पवित्र होकर लौटता है। सैयद खालिद सैफुल्लाह ने हज यात्रियों से अपील की कि वे विशेष रूप से भारत के लिए दुआ करें—जब वे पहली बार काबा देखें, लब्बैक कहें या अराफात में हाथ उठाकर प्रार्थना करें। उन्होंने कहा कि “देश में मोहब्बत बनी रहे, नफरत खत्म हो और हमारी आने वाली पीढ़ियां प्रेम की भाषा सीखें।” साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक लाभ के लिए समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि हज यात्री तेलंगाना और उसके लोगों के लिए भी विशेष दुआ करें।

हज की फीस कितनी होती है?

सऊदी अरब की यात्रा, आवास, भोजन और परिवहन के आधार पर कुल खर्च तय होता है। अलग-अलग पैकेज और सुविधाओं के अनुसार हज यात्रा की फीस बदल सकती है। सरकारी और निजी दोनों प्रकार की व्यवस्थाओं में लागत अलग होती है। हवाई किराया, होटल और सेवा शुल्क भी इसमें शामिल रहते हैं। हर वर्ष विनिमय दर और यात्रा नियमों के कारण खर्च में बदलाव हो सकता है। आधिकारिक घोषणा के अनुसार अंतिम राशि निर्धारित की जाती है।

मक्का मदीना में शैतान को पत्थर क्यों मारते हैं?

हज यात्रा के दौरान “रमी अल-जमरात” नामक धार्मिक प्रक्रिया की जाती है। यह प्रतीकात्मक रूप से बुराई और शैतानी विचारों को त्यागने का संकेत माना जाता है। इस परंपरा का संबंध इब्राहीम की धार्मिक कथा से जुड़ा बताया जाता है, जिसमें उन्होंने शैतान के बहकावे को अस्वीकार किया था। श्रद्धालु इस रस्म को आस्था और आत्मसंयम के प्रतीक के रूप में निभाते हैं। यह हज की महत्वपूर्ण धार्मिक प्रक्रियाओं में शामिल मानी जाती है।

क्या हम हज में ब्रा पहन सकते हैं?

महिलाओं के लिए हज के दौरान सादगीपूर्ण और शालीन वस्त्र पहनने की सलाह दी जाती है। सामान्य कपड़ों के अंदर आवश्यक वस्त्र पहनना व्यक्तिगत सुविधा और आवश्यकता पर निर्भर करता है। धार्मिक नियम मुख्य रूप से शालीनता और साधारण पहनावे पर जोर देते हैं। अलग-अलग विद्वानों की राय में कुछ भिन्नता हो सकती है, इसलिए सही जानकारी के लिए धार्मिक मार्गदर्शक से सलाह लेना बेहतर माना जाता है। आरामदायक और नियमों के अनुरूप कपड़े पहनना महत्वपूर्ण होता है।

क्या हिंदुओं के लिए हज की अनुमति है?

यह यात्रा इस्लाम धर्म का एक महत्वपूर्ण धार्मिक कर्तव्य मानी जाती है और सामान्य रूप से केवल मुस्लिम श्रद्धालुओं के लिए निर्धारित होती है। सऊदी अरब के धार्मिक नियमों के अनुसार गैर-मुस्लिम लोगों को मक्का के पवित्र क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं होती। मदीना के कुछ क्षेत्रों में अलग नियम लागू हो सकते हैं। हज यात्रा में भाग लेने के लिए मुस्लिम होना आवश्यक माना जाता है। धार्मिक और प्रशासनिक नियमों का पालन सभी यात्रियों के लिए जरूरी होता है।

Read Telugu News: https://vaartha.com/

यह भी पढ़ें :

Ajay Kumar Shukla

लेखक परिचय

Ajay Kumar Shukla

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।