हैदराबाद। तेलंगाना राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) बी. शिवधर रेड्डी ने सीपीआई (माओवादी) के भूमिगत नेताओं और कैडरों से हिंसा छोड़कर अपने हथियार डालने और लोकतांत्रिक मुख्यधारा में लौटकर सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन जीने की हार्दिक अपील की। डीजीपी ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी द्वारा पहले की गई अपील का स्मरण कराते हुए माओवादी कैडरों से आग्रह किया कि वे भूमिगत जीवन छोड़कर अपने परिवारों के पास लौटें और समाज में शांतिपूर्ण जीवन अपनाएँ। पिछले दो वर्षों में तेलंगाना पुलिस (TP) के सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप अब तक 721 माओवादी, जो तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के विभिन्न रैंकों से संबंधित हैं, ने आत्मसमर्पण किया और मुख्यधारा में लौटे। इसमें 4 केंद्रीय समिति सदस्य, 19 राज्य समिति सदस्य और 36 डिविजनल समिति सदस्य शामिल हैं।
दिए गए वित्तीय सहायता और अन्य लाभ
डीजीपी ने बताया कि सभी आत्मसमर्पण करने वालों को राज्य सरकार की व्यापक पुनर्वास नीति के तहत वित्तीय सहायता और अन्य लाभ दिए गए हैं, जिससे वे अपने पैतृक गाँवों में सम्मानजनक जीवन जी सकें। विशेष रूप से, डीजीपी ने तेलंगाना के उन नागरिकों से अपील की जो अन्य राज्यों में माओवादी समूहों में सक्रिय हैं, जैसे मुप्पल्ला लक्ष्मण राव (गणपति), पुसुनुरी नरहरी (संतोष), वार्ता शेखर (मंग्थू), जोडे रत्नाबाई (सुधा), नक्का सुशीला (रेला) और रंगबोयिना भाग्य (रूपी), कि वे लौटकर पुनर्वास योजना का लाभ उठाएँ। डीजीपी ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार गणपति, जो स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं, के लिए हैदराबाद में उन्नत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराएगी।
मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत अपील का कराया स्मरण
उन्होंने मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत अपील का स्मरण कराया जो उन्होंने 7 मार्च को प्रेस कॉन्फ्रेंस में की थी, जब 130 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके थे। डीजीपी ने कहा कि राज्य की पुनर्वास नीति में विश्वास बढ़ रहा है और अन्य राज्यों के कैडर भी आत्मसमर्पण करने के लिए इच्छुक हो रहे हैं। उन्होंने भूमिगत व्यक्तियों के परिवार और रिश्तेदारों से आग्रह किया कि वे उन्हें शांतिपूर्ण मार्ग अपनाने के लिए मार्गदर्शन दें। डीजीपी बी. शिवधर रेड्डी ने दोहराया कि वर्तमान संदर्भ में स्थायी समाधान केवल लोकतांत्रिक माध्यमों के माध्यम से ही संभव है और माओवादी कैडरों से अपील की कि वे हिंसा छोड़कर विकास के साझीदार बनें।
माओवादी का मतलब क्या होता है?
माओवादी शब्द माओ ज़ेडोंग की विचारधारा से निकला है। यह एक ऐसी राजनीतिक विचारधारा है जो सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से सत्ता परिवर्तन और साम्यवादी व्यवस्था स्थापित करने की बात करती है। माओवादी आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों से क्रांति शुरू करने और धीरे-धीरे शासन व्यवस्था को बदलने में विश्वास रखते हैं। यह विचारधारा दुनिया के कई देशों में अलग-अलग रूपों में देखी गई है।
भारत में माओवादी लोग कौन हैं?
भारत में माओवादी वे उग्रवादी समूह हैं जो सरकार के खिलाफ सशस्त्र आंदोलन चलाते हैं और खुद को गरीब, आदिवासी तथा वंचित वर्गों के अधिकारों का रक्षक बताते हैं। इन्हें अक्सर नक्सली भी कहा जाता है, जिसका संबंध नक्सलबाड़ी आंदोलन से है। ये समूह मुख्य रूप से छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में सक्रिय रहे हैं।
नक्सलियों को पैसा कौन देता है?
नक्सली संगठनों की फंडिंग कई अवैध स्रोतों से होती है। इनमें ठेकेदारों, व्यापारियों और खनन कंपनियों से जबरन वसूली (लेवी), जंगल और खनिज संसाधनों पर नियंत्रण, अपहरण के जरिए फिरौती और स्थानीय स्तर पर कर जैसे तरीके शामिल होते हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ये समूह अपने प्रभाव वाले इलाकों में आर्थिक गतिविधियों से पैसा इकट्ठा करते हैं, जिससे उनके संगठन और गतिविधियां चलती रहती हैं।
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