हैदराबाद। जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (DGGI) ने बुधवार को बताया कि तेलंगाना कांग्रेस नेता एम. सुनील कुमार को जीएसटी धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। ऑरेंज पैसेंजर ट्रांसपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सुनील कुमार और ट्रिलियन लीड फैक्ट्री के प्रबंध निदेशक चेतन एन. को क्रमशः जीएसटी चोरी और फर्जी आईटीसी रैकेट के आरोप में पकड़ा गया है। हैदराबाद क्षेत्रीय इकाई के डीजीजीआई का दावा है कि सुनील कुमार को 28.24 करोड़ रुपये का वस्तु एवं सेवा कर (GST) एकत्र करते हुए पाया गया, लेकिन नियत तारीख के तीन महीने बाद भी उन्होंने धनराशि सरकार के पास जमा नहीं किया था।
22 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के मास्टरमाइंड
इसी तरह, ट्रिलियन लीड फैक्ट्री प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक चेतन, 22 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के मास्टरमाइंड थे। हैदराबाद क्षेत्रीय इकाई के डीजीजीआई ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि दोनों को सीजीएसटी अधिनियम 2017 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया है। डीजीजीआई के अधिकारियों ने सुनील कुमार और चेतन दोनों को नामपल्ली आपराधिक न्यायालय परिसर में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। डीजीजीआई ने कहा कि उसने संगठित जीएसटी चोरी के मामलों में प्रवर्तन कार्रवाई तेज कर दी है।
धोखाधड़ी नेटवर्क पर लगातार दबाव बनाए रखने के लिए किया गया था गिरफ्तार
डेटा विश्लेषण और अंतर-एजेंसी सहयोग के माध्यम से विकसित विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर, संगठित जीएसटी चोरी रैकेट के सरगनाओं के खिलाफ प्रवर्तन कार्रवाई शुरू की गई ताकि बड़े पैमाने पर, अंतर-राज्यीय, संगठित धोखाधड़ी नेटवर्क को नष्ट किया जा सके। एजेंसी ने कहा कि अपराधों की गंभीरता को देखते हुए और संगठित कर धोखाधड़ी नेटवर्क पर लगातार दबाव बनाए रखने के लिए दोनों व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था। सुनील कुमार निजामाबाद जिले के बल्कोंडा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी के प्रभारी भी हैं।
जुलाई 2023 में कांग्रेस पार्टी में हुए थे शामिल
उन्होंने 2023 के चुनावों में बल्कोंडा से चुनाव लड़ा था, लेकिन पूर्व मंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के नेता वेमुला प्रशांत रेड्डी से हार गए थे। जुलाई 2023 में, उन्होंने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे उपस्थिति में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए थे।
जीएसटी चोरी करने पर कितने साल की सजा होती है?
कानून के अनुसार कर चोरी की राशि पर सजा तय होती है। यदि जीएसटी चोरी की रकम 5 करोड़ रुपये से अधिक है, तो दोषी व्यक्ति को 5 साल तक की जेल हो सकती है। कम राशि के मामलों में 1 से 3 साल तक की कैद का प्रावधान है। इसके साथ भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध माना जाता है, जिससे गिरफ्तारी भी संभव होती है।
नकली जीएसटी बिल के लिए जुर्माना क्या है?
फर्जी जीएसटी बिल जारी करना या इस्तेमाल करना एक गंभीर अपराध माना जाता है। ऐसे मामलों में टैक्स की चोरी की गई राशि के बराबर या उससे अधिक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा इनपुट टैक्स क्रेडिट की पूरी राशि ब्याज सहित वसूली जाती है। यदि मामला बड़ा है, तो जुर्माने के साथ-साथ जेल की सजा भी हो सकती है। बार-बार अपराध करने पर सख्त कार्रवाई की जाती है।
जीएसटी धोखाधड़ी के बारे में शिकायत कैसे करें?
कर से जुड़ी धोखाधड़ी की सूचना देने के लिए जीएसटी विभाग को शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इसके लिए राज्य या केंद्र के जीएसटी कार्यालय में लिखित शिकायत दी जा सकती है। टोल-फ्री हेल्पलाइन, ईमेल या शिकायत पेटी के माध्यम से भी जानकारी दी जाती है। शिकायत में संबंधित फर्म, बिल नंबर और लेनदेन का विवरण देना जरूरी होता है, ताकि विभाग उचित जांच कर सके।
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