वन संरक्षण के लिए विशेष कदम, निरंतर विद्युत आपूर्ति
हैदराबाद। मेडारम महा जातरा (Medaram Maha Jatara) के शुभारंभ में अब केवल तीन दिन शेष हैं। इस अवसर पर जातरा में शामिल होने वाले लगभग सवा करोड़ श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए राज्य सरकार ने व्यापक प्रबंध किए हैं। 28 जनवरी से प्रारंभ होने वाली इस जातरा के दौरान श्रद्धालु जंपन्ना वागु में पवित्र स्नान कर सकें, इसके लिए सिंचाई विभाग (Irrigation Department) ने पिछली जातराओं की तुलना में अतिरिक्त व्यवस्थाएं की हैं। मुख्य रूप से रेड्डीगुड़ेम से जंपन्ना वागु होते हुए चिलकलगुट्टा तक जलस्तर बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। जंपन्ना वागु में स्थित 29 इन्फिल्ट्रेशन वेल्स की सिल्ट हटाई गई है।
इन्फिल्ट्रेशन वेल्स में सबमर्सिबल पंप लगाए गए
स्नान घाटों पर मौजूद बैटरी ऑफ टैप्स (बीओटी) की मरम्मत के साथ-साथ उन्हें निरंतर जल आपूर्ति देने हेतु इन्फिल्ट्रेशन वेल्स में सबमर्सिबल पंप लगाए गए हैं और पाइपलाइन बिछाने का कार्य सिंचाई विभाग द्वारा किया गया है। सिंचाई विभाग के माध्यम से लगभग 50 करोड़ की लागत से श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं। जंपन्ना वागु के पूरे क्षेत्र में 348 बैटरी ऑफ टैप्स, 119 कपड़े बदलने के कक्ष तथा जलस्तर को समान बनाए रखने के लिए 9 क्रॉस बंड्स का निर्माण किया गया है। इसके अतिरिक्त, जंपन्ना घाटों की सीढ़ियों की मरम्मत की गई है और जल की स्वच्छता बनाए रखने के लिए लगातार क्लोरीनेशन किया जा रहा है। ताड़वाई मंडल के घने जंगलों में आयोजित होने वाली इस मेदारम जातरा के दौरान वन एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए राज्य वन विभाग ने विशेष कदम उठाए हैं।
वाहनों की गति को नियंत्रित करने जैसे उपाय
विशेष रूप से वन संपदा को नुकसान से बचाने, वन क्षेत्रों में अग्नि दुर्घटनाओं की रोकथाम, तथा घने जंगलों से गुजरने वाले वाहनों की गति को नियंत्रित करने जैसे उपाय किए गए हैं। इसके साथ ही, खाली पड़ी वन भूमि में पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। मेडारम जातरा के दौरान अत्यंत महत्वपूर्ण विद्युत विभाग ने 24 घंटे बिना किसी बाधा के विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रबंध किए हैं। इसके लिए 911 विद्युत खंभे और 196 ट्रांसफॉर्मर स्थापित किए गए हैं तथा इनके रखरखाव के लिए 350 अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की गई है।
43 पार्किंग स्थलों पर भी विद्युत सुविधाएं
इसके अलावा, 43 पार्किंग स्थलों पर भी विद्युत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। जातरा क्षेत्र में मौजूद 11 केवी और 33 केवी सब-स्टेशनों को पहले ही तैयार कर लिया गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, जंपन्ना वागु के उन स्थलों पर जहां 11 केवी और 33 केवी लाइनें क्रॉस होती हैं, वहां 6 निगरानी टावर स्थापित किए गए हैं। 50 स्थानों पर विशेष आपातकालीन टीमें तैनात की गई हैं। ताड़वाई और पसरा मार्गों पर पेट्रोलिंग टीमों की भी नियुक्ति की गई है।

ऑपरेशन स्टाफ को विशेष रूप से किया गया तैनात
चार ट्रांसफॉर्मरों पर एक टीम (एक एई और तीन ऑपरेशन स्टाफ) निगरानी रखेगी। 33 केवी लाइनों की निगरानी ताड़वाई, पसरा, गोविंदरावपेट, चेल्पूर, एतूरुनागरम, कमलापुर और मुलुगु सब-स्टेशन क्षेत्रों में की जा रही है। इन्हीं क्षेत्रों में स्थित ईएचटी सब-स्टेशनों पर विद्युत आपूर्ति की निगरानी के लिए 20 इंजीनियरों और ऑपरेशन स्टाफ को विशेष रूप से तैनात किया गया है। आपातकालीन कार्यों के लिए सामग्री के परिवहन हेतु 30 वाहनों को भी आरक्षित किया गया है।
जातरा का क्या अर्थ है?
लोकभाषा में इसका अर्थ धार्मिक यात्रा या लोक उत्सव से होता है। यह आमतौर पर किसी देवी-देवता के सम्मान में आयोजित सामूहिक आयोजन होता है, जिसमें पूजा, मेले, नाटक और सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल रहती हैं।
जात्रा उत्सव कहाँ मनाया जाता है?
मुख्य रूप से यह उत्सव पूर्वी भारत के क्षेत्रों में देखने को मिलता है। गांवों और कस्बों में मंदिरों के आसपास बड़े स्तर पर इसका आयोजन होता है, जहां लोकनाट्य, भजन और परंपरागत कार्यक्रम होते हैं।
जात्रा किस राज्य का त्योहार है?
प्रमुख रूप से यह पश्चिम बंगाल का प्रसिद्ध लोक उत्सव माना जाता है। इसके अलावा ओडिशा, झारखंड और असम के कुछ हिस्सों में भी जात्रा परंपरा काफी लोकप्रिय है।
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