वोंटिमिट्टा ब्रह्मोत्सवों की तैयारियों की समीक्षा
तिरुपति। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् (TTD) के संयुक्त कार्यपालक अधिकारी वीरब्रह्मम् ने निर्देश दिया कि कोदंडरामस्वामी मंदिर के वार्षिक ब्रह्मोत्सवों की तैयारियों को शीघ्र पूर्ण करते हुए भव्य रूप से आयोजित किया जाए। ब्रह्मोत्सवों का शुभारंभ 26 मार्च को अंकुरार्पणम् से होगा, जबकि 27 मार्च को श्रीराम नवमी के पावन अवसर पर ध्वजारोहणम् संपन्न किया जाएगा। संयुक्त कार्यपालक अधिकारी ने सोमवार को अन्य अधिकारियों के साथ मंदिर परिसर तथा वोंटिमिट्टा स्थित कल्याण वेदिका में चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने 1 अप्रैल को आयोजित होने वाले श्री सीता राम कल्याणम् (Sri Sita Ram Kalyanam) की तैयारियों को पूर्व वर्षों के अनुभव को ध्यान में रखते हुए तीव्र गति से पूर्ण करने के निर्देश दिए।
पेयजल तथा मठ्ठा की समुचित व्यवस्था
उन्होंने कल्याणम् के दिन अपेक्षित हजारों श्रद्धालुओं के लिए अन्न प्रसाद, पेयजल तथा मठ्ठा की समुचित व्यवस्था करने को कहा। सभी विभागों को विशेष कार्ययोजना तैयार कर श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। ग्रीष्म ऋतु की तीव्र गर्मी से राहत प्रदान करने हेतु अभियंत्रण अधिकारियों को पैदल मार्गों पर शीतल रंग का लेप करने तथा आवश्यक स्थानों पर शामियाने लगाने के निर्देश दिए गए। शोभायात्रा के वाहनों तथा मंदिर रथ की उपयुक्तता और सुरक्षा की भली-भांति जांच कर प्रमाणित करने को कहा गया। चिकित्सा अधिकारियों को एंबुलेंस तत्पर रखने, प्राथमिक उपचार केंद्र स्थापित करने तथा आपात स्थिति से निपटने के लिए ओआरएस के पर्याप्त पैकेट उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए।
पार्किंग की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की सलाह
संयुक्त कार्यपालक अधिकारी ने सांस्कृतिक एवं संगीत कार्यक्रमों की रूपरेखा भी शीघ्र अंतिम रूप देने को कहा। आंध्र प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के अधिकारियों को श्रद्धालुओं के लिए सुगम परिवहन एवं पार्किंग की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की सलाह दी गई। सभी विभागीय अधिकारियों को पूर्ण रूप से तैयार रहने तथा कडपा जिले के जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण एवं समीक्षा बैठक में अधीक्षण अभियंता मनोहर, उप कार्यपालक अधिकारी शिव प्रसाद, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुसुमा, सतर्कता एवं सुरक्षा अधिकारी गिरिधर, विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता रवि शंकर रेड्डी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
ब्रह्मोत्सव कब मनाया जाता है?
यह पर्व प्रायः वर्ष में एक बार मंदिरों में बड़े उत्साह से आयोजित किया जाता है। दक्षिण भारत के प्रमुख वैष्णव मंदिरों में इसे विशेष रूप से मनाया जाता है। उदाहरण के लिए, तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर में यह उत्सव आमतौर पर सितंबर–अक्टूबर के बीच आश्विन मास में आयोजित होता है। विभिन्न मंदिरों में तिथियाँ स्थानीय पंचांग और परंपरा के अनुसार बदल सकती हैं, लेकिन आयोजन सदैव भव्य धार्मिक अनुष्ठानों के साथ होता है।
ब्रह्मोत्सवम का क्या अर्थ है?
इस शब्द का अर्थ “ब्रह्मा द्वारा किया गया उत्सव” माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने स्वयं भगवान विष्णु की आराधना के लिए इस महोत्सव का आयोजन किया था। इसलिए इसे अत्यंत पवित्र और दिव्य उत्सव माना जाता है। इसमें भगवान की विशेष पूजा, वाहन सेवाएँ, शोभायात्राएँ और वैदिक मंत्रोच्चार होते हैं, जो श्रद्धालुओं में आध्यात्मिक उत्साह और भक्ति भावना जागृत करते हैं।
ब्रह्मोत्सव कितने दिन का है?
यह उत्सव सामान्यतः नौ दिनों तक चलता है। पहले दिन अंकुरार्पण या ध्वजारोहण से शुभारंभ होता है और अंतिम दिन चक्र स्नान या ध्वजावतरण के साथ समापन किया जाता है। इन नौ दिनों में प्रतिदिन अलग-अलग वाहन सेवाएँ और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। हजारों श्रद्धालु दर्शन और शोभायात्राओं में भाग लेते हैं, जिससे मंदिर परिसर में भक्ति, संगीत और वैदिक परंपराओं का अद्भुत संगम दिखाई देता है।
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