विजयवाड़ा। आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नज़ीर (Governor S. Abdul Nazeer) ने मार्कापुर जिले के रायवरम के पास हुए भीषण सड़क हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। गुरुवार तड़के एक टिप्पर और निजी बस की टक्कर में कई यात्रियों के जिंदा जलने की खबर है। यह बस नेल्लोर जिले के उदयगिरि की ओर जा रही थी। राज्यपाल ने घायलों के उपचार और राहत कार्यों की समीक्षा (Review) करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
रोड एक्सीडेंट में कितना पैसा मिलता है?
मुआवजा तय राशि नहीं होती, बल्कि मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसमें चोट की गंभीरता, आय, उम्र और नुकसान को ध्यान में रखा जाता है। बीमा कंपनी या मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) के माध्यम से यह राशि तय होती है। सामान्यतः छोटे मामलों में हजारों से लाखों तक और गंभीर या मृत्यु के मामलों में लाखों से करोड़ तक मुआवजा मिल सकता है।
1 दिन में भारत में कितने एक्सीडेंट होते हैं?
भारत में रोजाना हजारों सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। सरकारी रिपोर्ट्स के अनुसार औसतन प्रतिदिन करीब 1,200 से 1,500 दुर्घटनाएं दर्ज की जाती हैं। इनमें से कई मामलों में चोटें और मौतें भी होती हैं। यह आंकड़ा समय और रिपोर्ट के अनुसार थोड़ा बदल सकता है, लेकिन यह दर्शाता है कि सड़क सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है।
एक्सीडेंट में मृत्यु होने पर कौन सी धारा लगती है?
ऐसे मामलों में आमतौर पर भारतीय दंड संहिता की धारा 304A लागू होती है, जो लापरवाही से मृत्यु होने पर लगती है। इसके अलावा परिस्थिति के अनुसार अन्य धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं, जैसे तेज गति या लापरवाही से वाहन चलाना। पुलिस जांच के बाद सही धाराएं तय की जाती हैं।
एक्सीडेंट केस कितने दिन में फाइनल हो जाता है?
समय निश्चित नहीं होता, क्योंकि यह केस की जटिलता, सबूत और अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में 6 महीने से 1 साल में फैसला हो सकता है, जबकि जटिल मामलों में कई साल भी लग सकते हैं। बीमा क्लेम वाले मामलों में MACT के जरिए अपेक्षाकृत जल्दी निपटारा हो सकता है, लेकिन देरी की संभावना हमेशा बनी रहती है।
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