हैदराबाद। तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल (Governor Shiv Pratap Shukla) ने राज्य के नागरिकों से ईंधन की बचत और विदेशी मुद्रा संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के अनुरूप देशहित में आवश्यक कदम है। लोक भवन की ओर से गुरुवार को जारी वीडियो संदेश में राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं के बावजूद अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम कर उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने बताया कि तेलंगाना के राज्यपाल (Governor) का पद संभालने के बाद उन्होंने भी वाहन उपयोग में कमी की है और अब लोक भवन में वाहनों के उपयोग को 50 प्रतिशत तक घटाने के निर्देश दिए हैं।
‘नशा मुक्त तेलंगाना’ अभियान चलाने की भी वकालत
राज्यपाल ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव से उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को पेट्रो डॉलर पर निर्भरता कम करनी होगी और विदेशी मुद्रा की बचत करनी होगी। उन्होंने नागरिकों से राष्ट्रीय मुद्रा के मूल्य की रक्षा के लिए जिम्मेदारीपूर्वक व्यवहार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री से भी आग्रह करेंगे कि सरकारी विभागों में मंत्रियों और अधिकारियों को वाहन उपयोग कम करने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही राजनीतिक नेताओं को भी अनावश्यक बड़े काफिलों से बचना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि जिस प्रकार प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और रक्षा मंत्री ने उदाहरण प्रस्तुत किया है, उसी प्रकार जनप्रतिनिधियों को भी उसका पालन करना चाहिए, तभी आम लोगों में जागरूकता फैलेगी।
देश से विदेशी मुद्रा के अनावश्यक बहिर्गमन को रोकने के लिए हर संभव किए प्रयास
उन्होंने कहा कि देश से विदेशी मुद्रा के अनावश्यक बहिर्गमन को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए। राज्यपाल ने राज्य में मादक पदार्थों के विरुद्ध अभियान को और मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में चलाए गए अपने नशा विरोधी अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि तेलंगाना में भी “नशा मुक्त तेलंगाना” अभियान शुरू किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रपत्रों के साथ विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने तथा दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने की शपथ दिलाई जाए।
उन्होंने कहा कि युवाओं के माध्यम से समाज तक एक प्रभावी संदेश पहुंचाया जा सकता है। राज्यपाल ने कहा कि किसी भी जनजागरूकता अभियान की सफलता में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि तेलंगाना में भी मीडिया के सहयोग से यह अभियान सफल होगा।
ईंधन से आप क्या समझते हैं?
ऐसे पदार्थ जिनका उपयोग ऊर्जा या गर्मी उत्पन्न करने के लिए किया जाता है, उन्हें ईंधन कहा जाता है। लकड़ी, कोयला, पेट्रोल, डीजल, गैस और बिजली उत्पादन में उपयोग होने वाले कई पदार्थ इसके उदाहरण माने जाते हैं। उद्योगों, वाहनों, रसोई और बिजली संयंत्रों में इनका व्यापक उपयोग होता है। जलने पर ये ऊर्जा पैदा करते हैं, जिससे मशीनें और उपकरण चलाए जाते हैं। आधुनिक जीवन और औद्योगिक विकास में ईंधन की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
ईंधन में कौन सी गैस पाई जाती है?
अलग-अलग प्रकार के ईंधनों में विभिन्न गैसें पाई जाती हैं। रसोई गैस में मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन गैस होती है, जबकि प्राकृतिक गैस में मीथेन प्रमुख मानी जाती है। पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों में भी कई ज्वलनशील रासायनिक तत्व मौजूद रहते हैं। इन गैसों का उपयोग ऊर्जा उत्पादन, खाना पकाने और वाहनों को चलाने में किया जाता है। ज्वलनशील होने के कारण इनके उपयोग में सावधानी बरतना जरूरी माना जाता है।
जैव ईंधन क्या है?
पेड़-पौधों, कृषि अवशेषों और जैविक पदार्थों से तैयार किए जाने वाले ईंधन को जैव ईंधन कहा जाता है। बायोडीजल, बायोगैस और एथेनॉल इसके प्रमुख उदाहरण माने जाते हैं। यह पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों की तुलना में अधिक पर्यावरण अनुकूल माना जाता है। कृषि और जैविक कचरे का उपयोग करके ऊर्जा उत्पादन करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। प्रदूषण कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए दुनिया के कई देश जैव ईंधन के उपयोग पर जोर दे रहे हैं।
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