हैदराबाद। तेलंगाना राज्य महिला सुरक्षा विंग की डीजी चारू सिन्हा (DG Charu Sinha) ने कहा कि समाज में महिलाओं के प्रति होने वाला रोजमर्रा का लैंगिक भेदभाव उनकी मानसिक सुरक्षा पर गंभीर असर डाल रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले छोटे-छोटे तंज, असभ्य टिप्पणियां और भेदभावपूर्ण व्यवहार धीरे-धीरे सामान्य मान लिए गए हैं, जो चिंता का विषय है। हैदराबाद स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी में स्थित वी-हब के मंच पर ‘स्टैंड विद हर’ अभियान के तहत शनिवार को ‘एवरीडे सेक्सिज्म एंड इमोशनल सेफ्टी’ विषय पर एक पैनल चर्चा (panel discussion) आयोजित की गई। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों और गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया तथा महिलाओं के प्रति समाज में मौजूद भेदभावपूर्ण सोच पर विस्तार से चर्चा की।
महिला सुरक्षा विंग की ओर से ‘स्टैंड विद हर’ पैनल चर्चा आयोजित
इस अवसर पर चारू सिन्हा ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ होने वाली छोटी-छोटी घटनाओं को अपराध नहीं माना जाता, यही सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि जब तक पुरुष अपनी सोच और व्यवहार में बदलाव नहीं लाएंगे, तब तक महिलाओं को सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण नहीं मिल सकेगा। कॉरपोरेट क्षेत्र से आईं शैलजा जोश्युला ने कहा कि महिलाओं की पसंद और निर्णयों का सम्मान करना समाज को सीखना होगा। पुराने और रूढ़िवादी विचारों को छोड़ने पर ही वास्तविक बदलाव संभव है। फिल्म निर्देशक शैलेश कोलानू ने कहा कि महिला पात्रों को प्रस्तुत करते समय संवेदनशीलता बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि समाज तभी बेहतर दिशा में आगे बढ़ेगा, जब लोग यह स्वीकार करेंगे कि उन्हें अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है।
शरद चंद्र ने महिलाओं से अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने का आह्वान किया। वहीं मसूद हुसैनी ने कहा कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर महिलाएं जीवन में बेहतर निर्णय लेने में सक्षम होती हैं। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रेमा मालिनी ने किया। आयोजकों ने बताया कि ‘स्टैंड विद हर’ अभियान वर्षभर चलाया जाएगा, जिसके तहत हर महीने किसी सामाजिक मुद्दे पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
महिला सुरक्षा क्या होती है?
महिलाओं को शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और डिजिटल खतरों से सुरक्षित रखने की व्यवस्था को महिला सुरक्षा कहा जाता है। इसका उद्देश्य महिलाओं को बिना डर के शिक्षा, नौकरी, यात्रा और सामान्य जीवन जीने का अधिकार देना होता है। इसके लिए कानून, पुलिस सहायता और जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं।
महिला सुरक्षा के लिए कौन सा नंबर डायल करें?
आपात स्थिति में महिलाएं 112 इमरजेंसी हेल्पलाइन या 1091 महिला हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकती हैं। कई राज्यों में महिला सुरक्षा के लिए अलग हेल्पलाइन और मोबाइल ऐप भी उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से तुरंत पुलिस सहायता प्राप्त की जा सकती है।
महिला सुरक्षा एक्ट क्या है?
महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए भारत में कई कानून बनाए गए हैं। इनमें Protection of Women from Domestic Violence Act 2005, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून और दहेज निषेध कानून प्रमुख हैं। इन कानूनों का उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न को रोकना तथा उन्हें कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है।
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