Singreni : पहली बार महिलाएं संभालेंगी भारी डंपरों की कमान

Read Time:  1 min
भारी
भारी
FONT SIZE
GET APP

हैदराबाद। सिंगरेनी कोयला खदान (Coal mine) कंपनी लिमिटेड ने अपने 13 दशक लंबे इतिहास में पहली बार महिलाओं को भारी डंपर चालक के रूप में नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य सरकार के निर्देश पर कंपनी प्रबंधन ने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए यह पहल की है। जल्द जारी होने वाली डंपर चालक भर्ती में महिलाओं को भी अवसर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी तथा उपमुख्यमंत्री (DCM) भट्टी विक्रमार्क मल्लू के निर्देश पर कंपनी ने यह निर्णय लिया है। सिंगरेनी की खुली खदानों में 60 से 100 टन क्षमता वाले विशाल डंपरों का उपयोग कोयला और मिट्टी की ढुलाई के लिए किया जाता है। अब तक इन डंपरों का संचालन केवल पुरुष कर्मचारी ही करते रहे हैं।

राज्य सरकार के निर्देश पर महिला डंपर चालकों की भर्ती की तैयारी

कंपनी के अधिकारियों के अनुसार भारी डंपर चलाना अत्यंत कठिन और चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसके लिए शारीरिक क्षमता, तकनीकी दक्षता तथा विपरीत परिस्थितियों में कार्य करने का अनुभव आवश्यक होता है। भीषण गर्मी, तेज वर्षा और कड़ाके की ठंड में भी तीनों पालियों में डंपर संचालन करना पड़ता है। इसके बावजूद महिलाओं ने इस कार्य में रुचि दिखाई है। इच्छुक महिला कर्मचारियों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे, जिसमें लगभग 35 महिलाएं आगे आईं। भारी वाहन संचालन का प्रशिक्षण देने के लिए कंपनी ने सिरिसिल्ला स्थित तेलंगाना वाहन प्रशिक्षण एवं कौशल संस्थान के माध्यम से निःशुल्क प्रशिक्षण की व्यवस्था की। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाली 13 महिला कर्मचारियों ने डंपर चालक के रूप में कार्य करने की सहमति दी है।

भारी

आगामी भर्ती प्रक्रिया में प्रदान किया जाएगा अवसर

कंपनी प्रबंधन ने बताया कि आगामी भर्ती प्रक्रिया में उन्हें अवसर प्रदान किया जाएगा। महिला कर्मचारियों ने कहा कि प्रारंभ में इतने बड़े डंपर चलाने को लेकर उनमें भय और संकोच था, लेकिन प्रशिक्षण के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और अब वे इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने राज्य सरकार और कंपनी प्रबंधन के प्रति आभार व्यक्त किया। अधिकारियों ने बताया कि सिंगरेनी में पहले ही बेल्लमपल्ली की खैरीगुड़ा खुली खदान में महिलाओं को विस्फोट कार्य जैसे चुनौतीपूर्ण दायित्व सौंपे जा चुके हैं, जहां वे पुरुष कर्मचारियों के समान दक्षता से कार्य कर रही हैं। इसके अतिरिक्त कंपनी ने पहली बार महिला बचाव दल का भी गठन किया है। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी कठिन और तकनीकी कार्यों में महिलाओं को पुरुषों के समान अवसर प्रदान किए जाएंगे।

1 किलो कोयले की कीमत क्या है?

कीमत कोयले की गुणवत्ता, प्रकार और बाजार के अनुसार अलग-अलग होती है। घरेलू उपयोग, औद्योगिक उपयोग और बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कोयले के दाम अलग हो सकते हैं। सामान्य तौर पर खुदरा बाजार में इसकी कीमत कुछ रुपये प्रति किलो से शुरू होकर गुणवत्ता के अनुसार बढ़ जाती है। परिवहन लागत और क्षेत्र के अनुसार भी भाव बदलते रहते हैं। सरकारी और निजी कंपनियां अलग-अलग दरों पर आपूर्ति करती हैं। ऊर्जा उत्पादन और उद्योगों में इसकी मांग के कारण बाजार मूल्य समय-समय पर बदलता रहता है।

भारत में प्रथम कोयला खदान कौन सी थी?

देश में सबसे पहली व्यावसायिक कोयला खदान पश्चिम बंगाल के रानीगंज क्षेत्र में मानी जाती है। यहां 18वीं शताब्दी के अंत में कोयले का खनन शुरू हुआ था। ब्रिटिश शासन के दौरान उद्योगों और रेलवे के विकास के लिए इसका उपयोग तेजी से बढ़ा। रानीगंज को भारत के कोयला उद्योग की शुरुआत का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। बाद में झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी बड़े पैमाने पर कोयला खनन विकसित हुआ।

भारत में सबसे ज्यादा कोयला कौन से राज्य में पाया जाता है?

Jharkhand को देश में सबसे अधिक कोयला भंडार वाले राज्यों में प्रमुख माना जाता है। झरिया, बोकारो और धनबाद जैसे क्षेत्र कोयला उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में भी बड़े कोयला भंडार पाए जाते हैं। बिजली उत्पादन और भारी उद्योगों के लिए यह खनिज बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में इन राज्यों की बड़ी भूमिका रहती है।

1 किलो कोयले से कितनी बिजली बनती है?

उत्पादन की मात्रा कोयले की गुणवत्ता और बिजली संयंत्र की तकनीक पर निर्भर करती है। सामान्य तौर पर 1 किलो अच्छे गुणवत्ता वाले कोयले से लगभग 2 से 3 यूनिट तक बिजली बनाई जा सकती है। तापीय विद्युत संयंत्रों में कोयले को जलाकर भाप तैयार की जाती है, जिससे टरबाइन चलती है और बिजली उत्पन्न होती है। ऊर्जा दक्षता और मशीनों की क्षमता के अनुसार उत्पादन में अंतर आ सकता है। देश में बिजली उत्पादन के प्रमुख स्रोतों में कोयला आधारित ऊर्जा संयंत्र शामिल हैं।

Read Telugu News: https://vaartha.com/

यह भी पढ़ें :

Ajay Kumar Shukla

लेखक परिचय

Ajay Kumar Shukla

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।