हैदराबाद। साइबराबाद साइबर क्राइम पुलिस (Crime Police) ने विशिंग और सिम स्वैपिंग के जरिए बैंक खातों से ठगी करने वाले एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने विभिन्न लोगों से 77 लाख 75 हजार 451 रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया था। साइबराबाद पुलिस आयुक्तालय के केंद्रीय अपराध पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले के अनुसार आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-डी के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार आरोपी खुद को सिटीबैंक प्रेस्टिज क्रेडिट कार्ड डिवीजन का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते थे। वे दूरसंचार विभाग के सत्यापन का बहाना बनाकर पीड़ितों को ई-सिम को फिजिकल सिम में बदलने के लिए राजी करते थे। इसके बाद आरोपियों द्वारा पहले से तैयार मोबाइल उपकरण कूरियर के माध्यम से भेजे जाते थे, जिनमें हानिकारक एप्लिकेशन इंस्टॉल रहते थे।
विशिंग और सिम स्वैपिंग के जरिए 77 लाख रुपये से अधिक की ठगी
जैसे ही पीड़ित उन उपकरणों में सिम कार्ड डालते थे, बैंक से संबंधित ओटीपी और अलर्ट आरोपियों तक पहुंचने लगते थे। इसके माध्यम से आरोपी बैंक खातों तक अनधिकृत पहुंच हासिल कर ऑनलाइन लेनदेन कर रकम निकाल लेते थे। पुलिस ने आरोपियों को ट्रांजिट वारंट पर गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पूछताछ के दौरान पश्चिम बंगाल स्थित आरोपियों के ठिकानों से 15 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। मुख्य आरोपी सलीम मंडल के पास से छह मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, पांच सिम कार्ड, सिटीबैंक लेबल, मोटोरोला स्टिकर और एक ऑक्स वॉयस ट्रांसमीटर केबल बरामद की गई। आरोपी सैयद हाशिम रजा उर्फ टिप्पू के पास से 13 लाख रुपये नकद और एक मोबाइल फोन जब्त किया गया।
बंसीधर के पास से दो लाख रुपये नकद और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ। अन्य आरोपियों के पास से भी मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। साइबर क्राइम के पुलिस उपायुक्त टी. साई मनोहर ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति को फोन पर ओटीपी, बैंकिंग विवरण या सिम संबंधी जानकारी साझा न करें। उन्होंने कहा कि अज्ञात स्रोतों से प्राप्त मोबाइल उपकरणों में सिम कार्ड लगाने से भी बचना चाहिए। पुलिस ने बताया कि मामले की आगे की जांच जारी है।
साइबराबाद पुलिस क्या है?
Cyberabad Police तेलंगाना का एक प्रमुख पुलिस आयुक्तालय है, जो हैदराबाद के आईटी और आसपास के क्षेत्रों में कानून व्यवस्था बनाए रखने का काम करता है। इसका गठन तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी और शहरी क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए किया गया था। साइबर अपराध, ट्रैफिक नियंत्रण और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। आधुनिक तकनीक और डिजिटल निगरानी प्रणाली का उपयोग करके यह पुलिस व्यवस्था को मजबूत बनाने का प्रयास करती है।
भारत का पहला साइबर अपराध पुलिस स्टेशन कौन सा है?
देश का पहला साइबर अपराध पुलिस स्टेशन Bengaluru में स्थापित किया गया था। इसे इंटरनेट और डिजिटल माध्यम से होने वाले अपराधों की जांच के लिए शुरू किया गया था। ऑनलाइन धोखाधड़ी, हैकिंग, डेटा चोरी और साइबर उत्पीड़न जैसे मामलों की जांच यहां की जाती थी। तकनीकी विकास के साथ साइबर अपराध बढ़ने के कारण ऐसे विशेष पुलिस स्टेशनों की आवश्यकता महसूस की गई। बाद में कई राज्यों में भी साइबर क्राइम इकाइयों का विस्तार किया गया।
साइबर क्राइम पुलिस क्या करती है?
डिजिटल और इंटरनेट से जुड़े अपराधों की जांच और रोकथाम करना इसका मुख्य कार्य माना जाता है। ऑनलाइन धोखाधड़ी, बैंकिंग फ्रॉड, हैकिंग, सोशल मीडिया अपराध, पहचान चोरी और साइबर उत्पीड़न जैसे मामलों की जांच की जाती है। तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से अपराधियों का पता लगाया जाता है और डिजिटल सबूत एकत्र किए जाते हैं। लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करना भी इसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मानी जाती है। इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और ऑनलाइन अपराध नियंत्रण में इसकी बड़ी भूमिका होती है।
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