News Hindi : गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहादत वर्षगांठ श्रद्धा के साथ मनाई गई

Read Time:  1 min
गुरु तेग बहादुर
गुरु तेग बहादुर
FONT SIZE
GET APP

गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहादत श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई

हैदराबाद। नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर साहिब जी (Guru Tegh Bahadur Sahib Ji) की 350वीं शहादत वर्षगांठ रविवार को श्रद्धा, भक्ति और गहरे सम्मान के साथ मनाई गई। गुरु तेग बहादुर ने धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, जिसके कारण उन्हें “हिंद की चादर” (The Sheet of India) कहा जाता है। इस मौके पर उनकी शहादत और शिक्षाओं को याद करते हुए हजारों श्रद्धालुओं ने कीर्तन, अरदास और समागम में भाग लेकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। यह आयोजन गुरुद्वारा साहिब सीताफलमंडी, सिकंदराबाद की प्रबंधक समिति और तेलंगाना के सभी गुरुद्वारों के सहयोग से एनटीआर स्टेडियम, इंदिरा पार्क परिसर में आयोजित किया गया।

कीर्तन दरबार में प्रसिद्ध रागी जत्थों की प्रस्तुति

विशाल कीर्तन दरबार में गुरु ग्रंथ साहिब जी के समक्ष भक्तों ने प्रार्थना की और प्रसिद्ध रागी जत्थों ने शब्द कीर्तन प्रस्तुत किया। भाई अनंतवीर सिंह (यूएसए), भाई गुरदेव सिंह (ऑस्ट्रेलिया), ज्ञानी शेर सिंह (अंबाला) सहित कई प्रमुख रागी जत्थों ने अपनी मधुर वाणी से वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। धार्मिक कथाओं और प्रवचनों के माध्यम से गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षाओं—साहस, निस्वार्थता, सत्य, न्याय, शांति और मानव गरिमा—पर प्रकाश डाला गया। प्रवचकों ने कहा कि गुरु जी का जीवन हमें अत्याचार के विरुद्ध खड़े होने और सभी धर्मों के प्रति सम्मान बनाए रखने की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष हरपाल सिंह, कंचन सिंह, प्रताप सिंह, राजेंद्र सिंह और रणजीत सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों ने आयोजन की रूपरेखा साझा की।

गुरु की शहादत का संदेश और लंगर का आयोजन

समिति के सदस्यों ने गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि उन्होंने कश्मीरी पंडितों समेत अनेक लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। चांदनी चौक, दिल्ली में यातनाएँ सहने और सिर कटने के बाद भी उनका संदेश अमर रहा। उनके साथ भाई मतीदास, भाई सतिदास और भाई दयाला के साहस को भी श्रद्धापूर्वक याद किया गया। कार्यक्रम के समापन पर गुरु का लंगर परोसा गया, जिसमें भक्तों ने एक साथ बैठकर भाईचारे, समानता और एकता की भावना का अनुभव किया। आयोजन ने गुरु साहिब की शिक्षाओं—सहिष्णुता, प्रेम और मानवता—को समाज में प्रसारित करने का संकल्प दोहराया।

औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर को क्यों मारा था?

औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर को इसलिए मारा था क्योंकि वे कश्मीरी पंडितों और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए खड़े हुए थे। औरंगजेब जबरन धर्मांतरण चाहता था, लेकिन गुरु तेग बहादुर ने इसका विरोध किया, जिससे उन्हें शहीद कर दिया गया।

गुरु तेग बहादुर कैसे शहीद हुए थे?

उनको दिल्ली में औरंगजेब के आदेश पर सार्वजनिक रूप से शहीद किया गया। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपने प्राण त्याग दिए। उन्हें तलवार से सिर काटकर मृत्यु दी गई, इस बलिदान के कारण वे हिंदू और सिख धर्म के रक्षक कहलाए।

गुरु तेग बहादुर का दूसरा नाम क्या था?

उनका दूसरा नाम त्यागमल था। उनका यह नाम उनके बचपन में रखा गया था, बाद में युद्ध में दिखाई गई बहादुरी के कारण उन्हें “तेग बहादुर” नाम मिला। वे सिखों के नौवें गुरु थे और अपने बलिदान के लिए ‘हिंद की चादर’ भी कहलाते हैं।

Read Telugu News: https://vaartha.com/

यह भी पढ़ें :

Ajay Kumar Shukla

लेखक परिचय

Ajay Kumar Shukla

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।