हैदराबाद। यूनेस्को में भारत के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि विशाल वी. शर्मा (Vishal V. Sharma) ने रविवार को मुलुगु जिले के पालमपेट गांव स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल रुद्रेश्वर (रामप्पा) मंदिर का दौरा किया। यह दौरा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और तेलंगाना सरकार के समन्वय से किए जा रहे संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों की समीक्षा के उद्देश्य से किया गया। श्री शर्मा, जिन्होंने यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 46वें सत्र के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया, इस प्रतिष्ठित पद पर आसीन होने वाले पहले भारतीय हैं। उनके नेतृत्व में वर्ष 2021 में रामप्पा मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था।
संरक्षण कार्यों का आकलन करने के लिए मुलुगु जिले का दौरा
हाल ही में उन्होंने नई दिल्ली के लाल किले में आयोजित अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सुरक्षा के लिए अंतर-सरकारी समिति के 20वें सत्र की अध्यक्षता भी की, जिसमें दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल किया गया। हैदराबाद में भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (इनकॉइस) के कार्यक्रम में भाग लेने के दौरान, राजदूत शर्मा ने व्यक्तिगत रूप से रामप्पा मंदिर में चल रहे संरक्षण कार्यों का आकलन करने के लिए मुलुगु जिले का दौरा किया। उनके साथ एएसआई के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. एच.आर. देसाई (उप अधीक्षण पुरातत्वविद), कृष्ण चैतन्य (उप सहायक अधीक्षण अभियंता) और डॉ. रोहिणी पांडे अंबेडकर (सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद)उपस्थित थे। इनकॉइस से वरिष्ठ कार्यकारी नागोजी राव भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
रामप्पा मंदिर कहाँ स्थित है?
तेलंगाना राज्य के मुलुगु जिले में स्थित रामप्पा मंदिर पालमपेट गांव के पास है। यह मंदिर हैदराबाद से लगभग 200 किलोमीटर दूर है और रामप्पा झील के समीप स्थित होने के कारण ऐतिहासिक और प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
काकतीय वंश ने कौन सा मंदिर बनवाया था?
काकतीय वंश ने रामप्पा मंदिर का निर्माण करवाया था। इसके अलावा उन्होंने हजार स्तंभ मंदिर, वारंगल किला और अन्य कई भव्य स्थापत्य रचनाएँ भी बनवाईं, जो काकतीय काल की कला, वास्तुकला और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाती हैं।
रामप्पा का इतिहास क्या है?
रामप्पा मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी में काकतीय शासक गणपति देव के सेनापति रेमप्पा ने करवाया था। मंदिर अपनी हल्की ईंटों, नक्काशीदार स्तंभों और उत्कृष्ट शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है, जिसके कारण इसे यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा मिला।
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