Indiramma houses scheme ;रोजगार के लिए खरीदी गई कार अब गरीबों के अपने घर के सपने में बाधा बन रही है। पिछली बीआरएस सरकार के दौरान दलित बंधु योजना के तहत कार खरीदकर कैब ड्राइवर के रूप में आजीविका चलाने वाले कई लोग अब इंदिरम्मा आवास योजना के तहत अयोग्य घोषित किए जा रहे हैं। घर न होने के बावजूद केवल कार होने के कारण उन्हें सरकारी सहायता से वंचित होना पड़ रहा है।
इंदिरम्मा आवास योजना की पात्रता और अपात्रता शर्तों को लेकर (Indiramma houses scheme) स्पष्टता न होने से यह समस्या सामने आई है। खासतौर पर कैब ड्राइवरों का मामला गंभीर बन गया है। हैदराबाद में कैब सेवाएं हजारों लोगों के लिए आजीविका का साधन बनी हैं। ग्रामीण इलाकों में रोजगार की कमी के कारण कई युवाओं ने दलित बंधु योजना की सहायता से कार खरीदकर कैब ड्राइविंग शुरू की थी। उस समय जो लोग गरीब माने गए, वही अब ‘कार होने’ के कारण अपात्र बन रहे हैं।
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शर्त ही बन गई बाधा
इंदिरम्मा योजना में यह शर्त है कि लाभार्थी के पास खुद की कार नहीं होनी चाहिए। इसी वजह से आजीविका के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कैब को भी निजी कार मान लिया गया है। कई मामलों में परिवार के किसी सदस्य के नाम पर कार होने से भी लाभार्थी अयोग्य घोषित हो गए।
मैदानी स्तर पर जांच के दौरान कई कैब ड्राइवरों को गरीब मानते हुए पहले पात्र घोषित किया गया और उन्हें मकान भी स्वीकृत किए गए। निर्माण शुरू होने के बाद जब भुगतान की प्रक्रिया शुरू हुई, तब आधार सत्यापन में कार की जानकारी सामने आई और बिल रोक दिए गए। पहले पात्र और बाद में अपात्र घोषित किए जाने से लाभार्थी परेशान हैं। अब वे स्थानीय विधायकों से मिलकर कैब ड्राइवरों को पात्र मानने की मांग कर रहे हैं।
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