ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को बनाता था निशाना, 10 करोड़ की धोखाधड़ी
हैदराबाद। साइबराबाद एसओटी बालानगर (Cyberabad SOT Balanagar) टीम और साइबर क्राइम पुलिस (Cyber Crime Police) ने आयप्पा सोसाइटी, माधापुर से संचालित एक इंटरनेशनल फेक कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया। बीएनएस और आईटी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, ‘रिज सॉल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड’ नाम से संचालित यह कॉल सेंटर ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को नकली पॉप-अप भेजता था, जिनमें कंप्यूटर हैक होने की झूठी चेतावनी दी जाती थी। इसके बाद पीड़ितों को एक स्पूफ्ड हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करने के लिए उकसाया जाता था, जिसे एक्स-लाइट के माध्यम से हैदराबाद के कॉल सेंटर से जोड़ा जाता था।
दो वर्षों में 8–10 करोड़ की धोखाधड़ी कर चुका है सिंडिकेट
टेली-कॉलर्स ऐनी डेस्क के जरिए पीड़ितों के कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस ले लेते थे, फिर उनके ऑनलाइन बैंक खातों में घुसकर पैसा ऑस्ट्रेलियाई बैंक खातों में स्थानांतरित कर देते थे। यह धन बाद में हवाला, क्रिप्टोकरेंसी और गुप्त चैनलों के जरिए भारत भेजा जाता था। पुलिस के मुताबिक यह सिंडिकेट दो वर्षों में 8–10 करोड़ की धोखाधड़ी कर चुका है। गिरफ्तार नौ टेली-कॉलर्स हैदराबाद, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के निवासी हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में येपुरी गणेश व मरमपुडु चेंना केशवा, निवासी लिंगाला गाँव, कल्लुरु मंडल, खम्मम जिला, तेलंगाना, एज़ाज़ अहमद, निवासी, ओडिशा राज्य, मौमिता मंडल, संबित रॉय, शैनिक बनर्जी, मौमिता मलिक , सिल्पी सामद्दर, कुनाल सिंह सभी निवासी पश्चिम बंगाल शामिल है।
कर्मचारियों की भर्ती करके इस ऑपरेशन को चलाते थे मुख्य आरोपी
मुख्य आरोपी नवीन और प्रकाश कर्मचारियों की भर्ती करके इस ऑपरेशन को चलाते थे, अभी फरार हैं। छापे के दौरान पुलिस ने 12 कंप्यूटर, 21 मोबाइल फोन, 45 ऑस्ट्रेलियाई बैंक खातों का विवरण, राउटर्स, स्टांप्स और एक थार वाहन जब्त किया। साइबराबाद पुलिस ने एनआरआई छात्रों और अभिभावकों से अपील की कि वे अपने अंतरराष्ट्रीय बैंक खातों को बिल्कुल भी न बेचें और न ही साझा करें, क्योंकि इनका इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग में व्यापक रूप से होता है।
साइबर क्राइम क्या है और इसके प्रकार?
साइबर क्राइम किसी भी ऐसी आपराधिक गतिविधि को कहते हैं, जो इंटरनेट, कंप्यूटर, मोबाइल या डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से की जाए। इसका उद्देश्य धोखाधड़ी, डेटा चोरी, हैकिंग, ऑनलाइन ठगी या पहचान दुरुपयोग हो सकता है।
मुख्य प्रकार:
- हैकिंग
- फ़िशिंग/स्मिशिंग/विशिंग
- ऑनलाइन फ्रॉड और स्कैम
- डेटा चोरी
- साइबर बुलिंग और ऑनलाइन हेरासमेंट
- रैंसमवेयर अटैक
- फेक कॉल सेंटर/तकनीकी सहायता धोखाधड़ी
1930 पर कॉल करने से क्या होता है?
1930 भारत सरकार की राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन है।
यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी, UPI/बैंक फ्रॉड, फ़िशिंग, सोशल मीडिया हैकिंग या किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होती है, तो वह तुरंत 1930 पर कॉल करके शिकायत दर्ज करा सकता है।
यह हेल्पलाइन आपकी शिकायत को तुरंत सिस्टम में दर्ज कर फंड ट्रेसिंग और ब्लॉकिंग की प्रक्रिया शुरू करती है ताकि आपके पैसे वापस मिलने की संभावना बढ़ सके।
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