मंत्री पोनम प्रभाकर रहे मुख्य अतिथि
हुस्नाबाद। हुस्नाबाद आरटीसी बस डिपो में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (मई डे) के अवसर पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें परिवहन मंत्री पोन्नम प्रभाकर (Ponnam Prabhakar) मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। मंत्री ने आरटीसी कर्मचारियों के साथ मिलकर मजदूर दिवस का उत्सव मनाया और हाल ही में आत्महत्या करने वाले ड्राइवर शंकर गौड़ को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष दंडी लक्ष्मी, उपाध्यक्ष चित्तारी पद्म, आरटीसी (RTC) ईडी सोलोमन, पार्षद, आरटीए सदस्य सूर्य वर्मा, मार्केट कमेटी उपाध्यक्ष बांका चंदू, एसीपी सदानंदम सहित कई अधिकारी और आरटीसी कर्मचारी मौजूद रहे।
मजदूरों की एकता बनाए रखना आवश्यक
मंत्री पोनम प्रभाकर ने कहा कि मजदूरों की एकता बनाए रखना आवश्यक है और सभी श्रमिकों को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि जनकल्याण सरकार बनने के 48 घंटे के भीतर महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजना शुरू की गई, जिससे आरटीसी को लाभ की स्थिति में लाने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि आरटीसी कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में 15 घंटे की वार्ता कर कई मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि आरटीसी के 11 प्रतिशत वेतन पुनरीक्षण को मंजूरी दी गई है और कर्मचारियों के हित में कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं, जिनमें आरटीसी का सरकार में विलय, कर्मचारी संघों के चुनाव और अन्य सुधार शामिल हैं।
प्रतिदिन लगभग 65 लाख यात्री बसों के माध्यम से करते हैं यात्रा
मंत्री ने कहा कि प्रतिदिन लगभग 65 लाख यात्री 10 हजार बसों के माध्यम से 35 लाख किलोमीटर की यात्रा करते हैं और सेवा का विस्तार लगातार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार पुराने बकाया भुगतान, पीएफ और अन्य देनदारियों का निपटारा कर रही है तथा बंद किए गए कर्मचारियों को पुनः नौकरी में लिया गया है। उन्होंने कहा कि नई बसों की खरीद, नए कर्मचारियों की भर्ती और बस स्टेशनों के विकास के कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। मंत्री ने आश्वासन दिया कि कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान में वे सरकार और आरटीसी के बीच सेतु का काम करेंगे और सभी मुद्दों का जल्द समाधान किया जाएगा।
1 मई को मजदूर दिवस क्यों मनाया जाता है?
यह दिन श्रमिकों के अधिकारों, सम्मान और उनके योगदान को मान्यता देने के लिए मनाया जाता है। 1 मई 1886 को अमेरिका के शिकागो में मजदूरों ने 8 घंटे काम की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन किया था। इस संघर्ष में कई मजदूरों ने बलिदान दिया। उनकी याद में हर वर्ष 1 मई को मजदूर दिवस मनाया जाता है, ताकि श्रमिकों के अधिकारों और सामाजिक न्याय के महत्व को याद रखा जा सके।
मजदूर दिवस के जनक कौन हैं?
आंदोलन को संगठित रूप देने में कई नेताओं का योगदान रहा, लेकिन पीटर मैकग्वायर को अक्सर मजदूर दिवस का जनक माना जाता है। वे अमेरिका के एक प्रमुख श्रमिक नेता और बढ़ई थे। उन्होंने श्रमिकों के लिए बेहतर वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और उचित काम के घंटे की मांग उठाई। उनके प्रयासों से श्रमिक अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ी और मजदूर दिवस की परंपरा मजबूत हुई।
मजदूर दिवस का इतिहास क्या है?
इसकी शुरुआत 19वीं सदी में औद्योगिक क्रांति के दौरान हुई, जब मजदूरों से लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में काम कराया जाता था। 1886 में शिकागो के हेमार्केट आंदोलन ने श्रमिक अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी। 1889 में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन में 1 मई को श्रमिक दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। इसके बाद कई देशों में यह दिन मजदूरों के सम्मान में मनाया जाने लगा।
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