हैदराबाद। दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि वह पूर्व बीआरएस (BRS) विधायक कविता की राजनीतिक पार्टी, तेलंगाना प्रजा जागृति के पंजीकरण के लिए दाखिल याचिका पर विचार करें। चुनाव आयोग के वकील ने कहा कि काविता की आवेदन जल्द ही निर्णय के लिए आएगा। कविता के वकील ने बताया कि 23 फरवरी को चुनाव आयोग द्वारा बताई गई कमियों को दूर कर दिया गया है। कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए चुनाव आयोग को आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता के वकील ने चार सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश देने की मांग की, क्योंकि तेलंगाना में स्थानीय निकाय चुनाव (Election) अप्रैल के मध्य में होने वाले हैं। कोर्ट ने किसी समय सीमा का आदेश नहीं दिया।
सितंबर 2025 में बीआरएस से कर दिया गया था निलंबित
गौरतलब है कि कविता को सितंबर 2025 में बीआरएस से निलंबित कर दिया गया था, जब उन्होंने अपने चचेरे भाइयों और पार्टी नेताओं पर आरोप लगाया कि वे उनके पिता, पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) की छवि को खराब कर रहे हैं। इसके बाद काविता ने बीआरएस से इस्तीफा दे दिया और अपनी नई पार्टी के तहत अगली विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की। कविता अब तेलंगाना जागृति के बैनर तले सार्वजनिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
दिल्ली में कितने हाईकोर्ट हैं?
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में केवल एक ही उच्च न्यायालय कार्यरत है, जिसे Delhi High Court के नाम से जाना जाता है। यह पूरे दिल्ली क्षेत्र के लिए सर्वोच्च न्यायिक संस्था है। यहां सिविल, क्रिमिनल और संवैधानिक मामलों की सुनवाई की जाती है। देश के अन्य राज्यों की तरह दिल्ली में अलग-अलग हाईकोर्ट नहीं हैं, बल्कि एक ही उच्च न्यायालय पूरे क्षेत्र की न्यायिक जरूरतों को संभालता है।
क्या दिल्ली में भी हाई कोर्ट है?
हाँ, राष्ट्रीय राजधानी में Delhi High Court स्थित है, जो दिल्ली का सर्वोच्च न्यायालय है। इसकी स्थापना 1966 में हुई थी। यह अदालत विभिन्न प्रकार के मामलों जैसे नागरिक, आपराधिक और संवैधानिक विवादों की सुनवाई करती है। यहां मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीश मिलकर न्यायिक कार्य करते हैं और यह भारत की प्रमुख उच्च न्यायिक संस्थाओं में से एक मानी जाती है।
दिल्ली हाई कोर्ट के जज की सैलरी कितनी होती है?
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का वेतन केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया जाता है। Delhi High Court के मुख्य न्यायाधीश को लगभग 2.5 लाख रुपये प्रतिमाह और अन्य न्यायाधीशों को करीब 2.25 लाख रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है। इसके अलावा उन्हें आवास, भत्ते और अन्य सुविधाएं भी दी जाती हैं, जो उनके पद और जिम्मेदारियों के अनुरूप होती हैं।
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