Medaram : मेडारम महाजातरा में सांस्कृतिक वैभव का प्रदर्शन: सीतक्का

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मेडारम
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हैदराबाद : पंचायत राज मंत्री सीताक्का (Minister Seethakka) ने घोषणा की कि अगले वर्ष मेडारम सम्मक्का-सरलम्मा जातरा (Sammakka-Saralamma Jatara) 22 से 31 जनवरी तक अत्यंत गरिमापूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने इस उत्सव के आयोजन के लिए 150 करोड़ रुपये की उल्लेखनीय राशि आवंटित की है।

राज्य सरकार आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को प्राथमिकता दे रही है : मंत्री

मंत्री सीतक्का ने समाज कल्याण मंत्री अदलुरी लक्ष्मण कुमार के साथ सचिवालय में मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि राज्य सरकार आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को प्राथमिकता दे रही है और इस वर्ष सम्मक्का सरलम्मा महाजात्रा के लिए अभूतपूर्व 150 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। सीतक्का ने विस्तार से बताया कि इस उत्सव के लिए स्थायी बुनियादी ढाँचे का विकास कार्य चल रहा है, जिसमें दोहरी सड़कों का निर्माण, मौजूदा सड़कों का चौड़ीकरण, डिवाइडर लगाना और जम्पन्ना वागु से मेडारम स्थल तक 29 एकड़ भूमि में एक स्मारक पार्क का निर्माण शामिल है, जिसका प्रबंधन धर्मस्व विभाग द्वारा किया जाएगा।

श्रद्धालुओं के लिए सभी व्यवस्थाएँ सुचारू रूप से की जाएँगी

मंत्री ने कहा, “श्रद्धालुओं के लिए सभी व्यवस्थाएँ सुचारू रूप से की जाएँगी और सुरक्षा उपायों के लिए 12,000 पुलिस अधिकारी तैनात किए जाएँगे। हमारा लक्ष्य 13वीं शताब्दी के इस ऐतिहासिक मेले का आयोजन पूरी गरिमा के साथ करना है और यह सुनिश्चित करना है कि इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखा जाए।” इस अवसर पर, उन्होंने पंचायत राज विभाग की ओर से ‘पनुला जतरा 2025 पोस्टर’ का अनावरण किया। सीताक्का ने बताया, “शुक्रवार से राज्य भर में 2,198 करोड़ रुपये की लागत से 1.15 लाख परियोजनाएँ शुरू होंगी।”

मेडारम जतारा क्या है?

मेेडारम सम्मक्का-सरलम्मा जातरा (Medaram Sammakka-Saralamma Jatara) भारत के तेलंगाना राज्य में आयोजित होने वाला एक भव्य आदिवासी धार्मिक उत्सव है। यह दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा आदिवासी त्योहार माना जाता है, जिसमें 1 करोड़ से अधिक श्रद्धालु भाग लेते हैं। इस जातरा का आयोजन हर दो साल (Biennially) में होता है।

मेडारम जातरा में कितने दिन होते हैं?

चार दिवसीय आयोजन का क्रम:

  1. पहला दिन:
    • सरलम्मा देवी की आगमन यात्रा (arrival) होती है।
    • श्रद्धालु बड़ी संख्या में जंगल से चढ़ावे (बेलम, नारियल, हल्दी, सिंदूर आदि) लेकर आते हैं।
  2. दूसरा दिन:
    • सम्मक्का देवी का आगमन होता है।
    • यह दिन जातरा का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।
  3. तीसरा दिन:
    • पूजा, अर्चना, भंडारा और धार्मिक गतिविधियों का चरम होता है।
    • लाखों भक्त देवी को चढ़ावा अर्पित करते हैं।
  4. चौथा दिन:
    • देवी सम्मक्का और सरलम्मा की विदाई यात्रा होती है।
    • इसे ‘विग्रहों की वापसी’ कहा जाता है, और जातरा का समापन होता है।

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Ajay Kumar Shukla

लेखक परिचय

Ajay Kumar Shukla

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