हैदराबाद। भाजपा सांसद ईटेला राजेंद्र (Etela Rajender) ने कहा है कि मलकाजगिरी नगर निगम को विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे से जुड़ी बढ़ती समस्याओं के समाधान के लिए बड़े पैमाने पर धन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कई नगरपालिकाओं और गांवों के विलय के बाद इस क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं पर दबाव काफी बढ़ गया है। नागोले स्थित एक निजी होटल में आयोजित विकास कार्यों की समीक्षा बैठक (Meeting) में बोलते हुए उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, जो पहले मलकाजगिरी लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, इस क्षेत्र की समस्याओं से अच्छी तरह परिचित हैं।
नगर निगम को पर्याप्त बजट दिया जाना जरूरी
बैठक में ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें जवाहर नगर डंपिंग यार्ड, छोटे कचरा स्थल, झीलों का प्रदूषण, जलकुंभी की समस्या, सीसीटीवी की कमी, चोरी की घटनाएं, खराब स्ट्रीट लाइटिंग, पेयजल संकट और जल निकासी की समस्या शामिल रही। सांसद ने कहा कि विकास कार्यों को धन की कमी के कारण बाधित नहीं होने देना चाहिए और नगर निगम को पर्याप्त बजट दिया जाना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि डंपिंग यार्ड जैसी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए सभी राजनीतिक दलों और संबंधित पक्षों को मिलकर काम करना होगा। इस बैठक में कई विधायक, नगर निगम के अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
नगर निगम का सबसे बड़ा अधिकारी कौन होता है?
नगर निगम में सबसे बड़ा प्रशासनिक अधिकारी नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) होता है। यह अधिकारी नगर निगम के सभी कार्यों जैसे सफाई, जल आपूर्ति, सड़क निर्माण, टैक्स वसूली और विकास योजनाओं की निगरानी करता है। नगर आयुक्त का चयन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है और वह पूरे नगर निगम प्रशासन का प्रमुख होता है। इसके साथ-साथ महापौर (Mayor) जनप्रतिनिधि होते हैं, लेकिन कार्यकारी शक्ति नगर आयुक्त के पास अधिक होती है।
कानपुर में हाउस टैक्स की दरें क्या हैं?
कानपुर में हाउस टैक्स की दरें संपत्ति के प्रकार, क्षेत्र और उपयोग (आवासीय या व्यावसायिक) के आधार पर तय की जाती हैं। सामान्यतः आवासीय संपत्ति पर कम दर और व्यावसायिक संपत्ति पर अधिक दर लगती है। यह कर संपत्ति के वार्षिक किराया मूल्य या क्षेत्रफल के आधार पर गणना किया जाता है। सटीक दरें नगर निगम द्वारा समय-समय पर संशोधित की जाती हैं। ऑनलाइन पोर्टल पर नागरिक अपनी संपत्ति की टैक्स जानकारी देख सकते हैं।
यूपी में हाउस टैक्स की रेट कितनी है?
उत्तर प्रदेश में हाउस टैक्स की दरें नगर निगम और नगर पालिका के अनुसार अलग-अलग होती हैं। यह दरें संपत्ति के उपयोग, लोकेशन और क्षेत्रफल पर निर्भर करती हैं। शहरी क्षेत्रों में आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों के लिए अलग-अलग टैक्स स्लैब लागू होते हैं। राज्य सरकार समय-समय पर इन दरों में संशोधन करती रहती है। सही जानकारी संबंधित नगर निकाय की आधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है।
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