New Delhi : एनजीटी ने केंद्रीय और राज्य प्रदूषण बोर्ड को जारी की नोटिस

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तेलंगाना में गोदावरी नदी प्रदूषण

नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गोदावरी नदी में औद्योगिक अपशिष्टों और अनुपचारित सीवेज के अनियंत्रित निर्वहन के कारण कथित रूप से हो रहे गंभीर प्रदूषण के संबंध में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और अन्य से जवाब मांगा है। हरित निकाय एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रहा था, जिसमें उसने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया था, जिसमें दावा किया गया था कि गोदावरी नदी के तेलंगाना खंड में प्रदूषण का स्तर गंभीर बिंदु पर पहुंच गया है, तथा आदिलाबाद, करीमनगर, वारंगल और खम्मम जैसे जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं।

एनजीटी अध्यक्ष ने क्या कहा

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने 29 मई के आदेश में कहा, ‘समाचारों में आगे कहा गया है कि भद्राचलम जैसे स्थानों में नदी का पानी काला हो गया है और उसमें से दुर्गंध आ रही है, जिससे वह मानव उपयोग के लिए अनुपयुक्त हो गया है।’

आदेश क्या है

आदेश में कहा गया है, ‘इसके अलावा, समाचार में बताया गया है कि महाराष्ट्र में नासिक से पैठण तक गोदावरी का 300 किलोमीटर का क्षेत्र अत्यधिक उच्च कार्बनिक प्रदूषण का सामना कर रहा है।

जिसमें बीओडी का स्तर बहुत अधिक है, जिससे जलीय जीवन को खतरा है।’ पीठ ने रिपोर्ट पर गौर किया, जिसके अनुसार “औरंगाबाद और पैठण में भारी धातु संदूषण के कारण पानी में लोहा, जस्ता, निकल और तांबा अत्यधिक मात्रा में पाया गया है, जिससे पानी पीने के लिए असुरक्षित हो गया है” और “प्रदूषण संकट” आंध्र प्रदेश में गहरा रहा है, विशेष रूप से राजामहेंद्रवरम से लेकर दौलेश्वरम बैराज तक, जिसे भारत में किसी भी नदी के सबसे प्रदूषित खंडों में से एक के रूप में पहचाना जाता है”।

सीधे नदी में प्रवाहित हो जाता है कृषि अपशिष्ट

पीठ ने कहा, ‘समाचार में कहा गया है कि नासिक और नांदेड़ के निकट के खेतों से उर्वरक और कीटनाशकों सहित कृषि अपशिष्ट बिना किसी फिल्टरेशन के सीधे नदी में प्रवाहित हो जाता है।’ रिपोर्ट में पर्यावरण मानदंडों के अनुपालन के संबंध में “काफी मुद्दे” उजागर हुए हैं। पीठ ने सीपीसीबी और तेलंगाना राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिवों और गोदावरी नदी प्रबंधन बोर्ड के अध्यक्ष को प्रतिवादी या पक्षकार बनाया। न्यायालय ने मामले को 1 अगस्त को चेन्नई स्थित अपनी दक्षिणी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करते हुए कहा, ‘उपर्युक्त प्रतिवादियों को अपना प्रत्युत्तर/उत्तर दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया जाए।’

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