हैदराबाद । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष डॉ. वी नारायणन ने कहा कि भारत के पास चंद्रमा पर स्थापित सर्वोत्तम कैमरा है। भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला पहला देश है। वे भारतीय रेलवे का प्रमुख केंद्रीकृत प्रशिक्षण संस्थान, भारतीय रेलवे सिगनल इंजीनियरिंग और दूरसंचार संस्थान (IRICET) के 68 वें वार्षिक दिवस के मौके पर बोल रहे थे।
भारतीय रेल और इसरो के बीच अनेक समानता
डॉ. वी नारायणन अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी प्रगति के साथ भारतीय रेल नेटवर्क की सभी ट्रेनों की वास्तविक समय में निगरानी पहले से ही कार्यान्वित की जा चुकी है। अध्यक्ष, इसरो ने भारतीय रेल और इसरो के बीच अनेक समानताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ट्रेनों के सुरक्षित संचालन के लिए संचार अत्यंत आवश्यक है और इसरो ने अनेक उपग्रह प्रक्षेपित किए हैं, जो आवश्यक संचार सुविधाएँ प्रदान कर रहे हैं। अध्यक्ष, इसरो ने इसरो की कई उपलब्धियों का उल्लेख किया और यह भी रेखांकित किया कि विभिन्न तकनीकी प्रगतियों के कार्यान्वयन हेतु इसरो और भारतीय रेल के बीच सहयोग के अवसर उपलब्ध हैं।

महानिदेशक, इरिसेट उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला
महानिदेशक, इरिसेट शरद कुमार श्रीवास्तव ने अपने उद्घाटन समारोह में नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 तक की अवधि की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के साथ-साथ इरिसेट की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होने आगे कहा कि पिछले एक वर्ष के दौरान इरिसेट ने प्रशिक्षण, तकनीकी क्षमता और राष्ट्रीय क्षमता निर्माण के क्षेत्र में शुरू की गई महत्वपूर्ण पहलों का अत्याधिक विस्तार किया है। संस्थान ने इस वर्ष 310 प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित कर 8462 प्रशिक्षुओं की रिकॉर्ड संख्या को प्रशिक्षित किया है, जिसमें 81407 प्रशिक्षु दिनों की उत्पादकता है। कवच पर प्रशिक्षण – भारत की स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली संस्थान का प्रमुख कार्यक्रम बना रहा, जिसमें इस वर्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, विद्युत, यांत्रिक, नागरिक, यातायात और अन्य विभागों के साथ-साथ सार्वजनिक उपक्रमों और निजी क्षेत्र की भागीदारी में 4,364 कार्मिंकों को प्रशिक्षित किया गया है।
जीएम ने सिगनलिंग और दूरसंचार एसेट्स की विश्वसनीयता पर बल दिया
संजय कुमार श्रीवास्तव, महाप्रबंधक, दक्षिण मध्य रेलवे ने संस्थान से कार्यबल के बहु-कौशल और भारतीय रेलवे में सिगनलिंग और दूरसंचार एसेट्स की विश्वसनीयता को बेहतर बनाने के लिए कौशल प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया। राजेश कुमार पांडे, अपर सदस्य (सिगनल), रेलवे बोर्ड ने समारोह को संबोधित करते हुए सिगनल एवं दूरसंचार इंजीनियरों से कहा कि वे अवसंरचना को बढ़ाने और अनुरक्षण पर होने वाले व्यय के हिसाब से तकनीकी के प्रभावी रूप से इस्तेमाल के लिए ज़रूरी कौशल हासिल करें। उन्होंने कहा कि इरिसेट ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाए जिससे नई भर्ती, ट्रेन संचालन में संरक्षा को अपने काम करने का तरीका बनाए और उसे सहज रूप से अपना सकें। शैलेश गुप्ता, अपर सदस्य (दूरसंचार), रेलवे बोर्ड ने देश की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए नवीन समाधान खोजने और बेहतरीन माहौल बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
रेलवे सिग्नल और दूरसंचार विभाग क्या है?
रेलवे सिग्नल और दूरसंचार (S&T) विभाग भारतीय रेल का एक महत्वपूर्ण तकनीकी विभाग है। इसका मुख्य काम—
- ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना
- सिग्नलिंग सिस्टम का डिज़ाइन, रखरखाव और संचालन
- दूरसंचार प्रणाली (फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क, वायरलेस कम्युनिकेशन, ट्रेन रेडियो, इंटरकॉम आदि) का प्रबंधन
- पॉइंट्स/स्विच, इंटरलॉकिंग, ब्लॉक सिस्टम, ट्रेन डिटेक्शन सिस्टम (Axle Counter, Track Circuit) जैसी तकनीकों का संचालन
- आधुनिक तकनीकों जैसे ETCS, TPWS, Automatic Signalling का उपयोग और उन्नयन
सार में, S&T विभाग पूरी रेलवे में सेफ्टी, संचार और कंट्रोल की रीढ़ की हड्डी है।
रेलवे में कितने सिग्नल हैं?
भारतीय रेलवे में सिग्नल कई प्रकार के होते हैं। मुख्य श्रेणियाँ इस प्रकार हैं:
A. Function (कार्य) के आधार पर सिग्नल
- स्टार्टर सिग्नल (Starter Signal)
- एडवांस स्टार्टर (Advance Starter)
- होम सिग्नल (Home Signal)
- डिस्टेंट सिग्नल (Distant Signal)
- गेट सिग्नल (Gate Signal)
- शंटिंग सिग्नल (Shunt Signal)
- इंटरमीडिएट सिग्नल (Intermediate Signal)
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