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NHRC : एनएचआरसी ने उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की

Ajay Kumar Shukla
Ajay Kumar Shukla
NHRC : एनएचआरसी ने उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की

हैदराबाद। तेलंगाना में अपने दो दिवसीय शिविर के अंतर्गत, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने आज हैदराबाद के जुबली हिल्स स्थित डॉ. एमसीआर एचआरडी संस्थान में तेलंगाना सरकार (Telangana Government) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय आधिकारिक बैठक आयोजित की। इसका उद्देश्य प्रमुख मानवाधिकार मुद्दों (Human Rights Issues) की समीक्षा करना और संस्थागत तंत्रों एवं कल्याणकारी हस्तक्षेपों के माध्यम से प्रणालीगत चुनौतियों का समाधान करने में राज्य के प्रयासों का आकलन करना था।

बैठक की अध्यक्षता एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम ने की

इस बैठक की अध्यक्षता एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम ने की और इसमें सदस्य न्यायमूर्ति विद्युत रंजन सारंगी और विजया भारती सयानी ने भाग लिया। तेलंगाना राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति डॉ. शमीम अख्तर ने भी इसमें भाग लिया। एनएचआरसी के वरिष्ठ अधिकारियों में महासचिव भरत लाल, महानिदेशक (जांच) आर.पी. मीणा, उप रजिस्ट्रार (विधि) इंद्रजीत, डॉ. मुकेश और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (जांच) इलक्किया करुणागरन शामिल थे।

मुख्य सचिव रामकृष्ण राव ने राज्य प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया

मुख्य सचिव रामकृष्ण राव ने राज्य प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, जिसमें गृह, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, वन, कृषि, वित्त, अनुसूचित जाति विकास और पुलिस सहित प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। विचार-विमर्श महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध, कुपोषण, मानव-पशु संघर्ष, शिक्षा अंतराल, अनुसूचित जाति कल्याण, किसानों की समस्या और एलजीबीटीक्यूआई+ अधिकारों पर केंद्रित था।रवि गुप्ता, आईपीएस, विशेष मुख्य सचिव (गृह) ने अंतर्विभागीय सूचनाओं का समन्वय किया और कानून के शासन, संस्थागत पारदर्शिता और मानवाधिकार प्रवर्तन में निरंतर प्रशासनिक सुधार के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता दोहराई। चारु सिन्हा, आईपीएस, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा एवं सीआईडी) ने महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने और एलजीबीटीक्यूआई+ अधिकारों की रक्षा के लिए किए गए उपायों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया

मैत्री क्लीनिकों की स्थापना पर प्रकाश डाला

उन्होंने शी टीमों के विस्तार, भरोसा केंद्रों के संचालन और प्रत्येक जिले में प्रशिक्षित कर्मचारियों के साथ ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए समर्पित स्वास्थ्य सुविधाओं -। उन्होंने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को यातायात सहायकों के रूप में नियुक्त करने के प्रयासों और तेलंगाना राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण क्लीनिकों के माध्यम से कानूनी सहायता प्रदान करने के बारे में भी जानकारी दी।

7 मानव अधिकार क्या है?

मानव अधिकार वे बुनियादी अधिकार हैं जो प्रत्येक व्यक्ति को भारतीय संविधान द्वारा गारंटीकृत होते हैं या अंतरराष्ट्रीय संधियों (जैसे संयुक्त राष्ट्र की नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों की संधि और आर्थिक‑सामाजिक-सांस्कृतिक अधिकारों की संधि) में शामिल हैं। इन्हें भारत में न्यायालयों द्वारा लागू किया जा सकता है। ये अधिकार जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा से संबंधित हैं।

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में कितने सदस्य होते हैं?

आयोग में एक अध्यक्ष तथा पांच पूर्णकालिक सदस्य होते हैं, यानि कुल 6 पूर्णकालिक सदस्य होते हैं।

भारत में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन कब हुआ था?

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना 12 अक्टूबर 1993 को की गई थी।

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