Hyderabad : मंत्री पोन्नम प्रभाकर को गीता मजदूरों ने भेंट किए ताड़ी के फल

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ताड़ी के फल
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स्वास्थ्य लाभ बताकर की सेवन की अपील

हैदराबाद। मंत्री क्वार्टर्स में मंत्री पोन्नम प्रभाकर (Ponnam Prabhakar) को हुस्नाबाद क्षेत्र के गीता मजदूरों ने प्रकृति का उपहार माने जाने वाले ताड़ी के फल (ताड़ी मुंजल) भेंट किए। इस दौरान मंत्री ने ताड़ी के फल का स्वाद लेते हुए खुशी व्यक्त की और कहा कि हर व्यक्ति को इनका सेवन करना चाहिए क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने कहा कि गर्मी के मौसम में ताड़ी के फल प्रकृति का एक अनमोल उपहार हैं और शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में गीता मजदूरों के लिए ताड़ी के फल आय का एक महत्वपूर्ण साधन भी हैं, जिससे उन्हें आर्थिक सहारा मिलता है। मंत्री ने तेलंगाना के लोगों से अपील करते हुए कहा कि सभी लोग इस प्राकृतिक फल (Natural Fruits) का सेवन कर इसका आनंद लें। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि तेलंगाना सरकार की ओर से ताड़ी के फलों के विपणन के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि ताड़ी के फल ताड़ी के पेड़ों से प्राप्त होते हैं और अन्य फलों की तरह इनमें किसी प्रकार का नशा नहीं होता, इसलिए सभी लोग इन्हें निःसंकोच खा सकते हैं।

ताड़ी पीना चाहिए कि नहीं?

स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से किसी भी प्रकार के नशीले पेय का सेवन सीमित या न करना ही बेहतर माना जाता है। ताड़ी एक प्राकृतिक पेय है, लेकिन इसमें किण्वन के बाद अल्कोहल बन सकता है। अधिक मात्रा में सेवन करने से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति इसका सेवन करता भी है तो संयम और सावधानी रखना जरूरी होता है।

ताड़ी का फल कैसे खाया जाता है?

आमतौर पर ताड़ के पेड़ से प्राप्त होता है, जिसे पका होने पर खाया जाता है। इसके अंदर नरम और जेली जैसा गूदा होता है, जिसे छीलकर सीधे खाया जाता है। कच्चे फल का स्वाद हल्का मीठा और ठंडक देने वाला होता है, जो गर्मियों में काफी लोकप्रिय होता है। इसे साफ करके ताजे रूप में ही खाना अधिक पसंद किया जाता है।

ताड़ी को हिंदी में क्या कहते हैं?

हिंदी में आमतौर पर ताड़ का रस या ताड़ का पेय कहा जाता है। यह ताड़ या खजूर के पेड़ से निकाला जाने वाला रस होता है, जिसे ताजा या किण्वित रूप में उपयोग किया जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसे अलग नामों से भी जाना जाता है, लेकिन सामान्य रूप से इसे ताड़ रस के रूप में समझा जाता है।

ताड़ी में नशा होता है क्या?

ताजा अवस्था में यह पेय सामान्य मीठा रस होता है, जिसमें नशा नहीं होता। लेकिन समय के साथ जब इसमें किण्वन प्रक्रिया शुरू होती है, तब इसमें अल्कोहल बनता है और हल्का नशा उत्पन्न हो सकता है। लंबे समय तक रखा हुआ ताड़ी अधिक किण्वित हो जाता है, जिससे उसका नशे का प्रभाव बढ़ जाता है। इसलिए इसका प्रभाव उसकी ताजगी पर निर्भर करता है।

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Ajay Kumar Shukla

लेखक परिचय

Ajay Kumar Shukla

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