हैदराबाद। तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला (Governor Shiv Pratap Shukla) ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण भारतीय संस्कृति, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भविष्य की पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए जैव विविधता का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। वे नेहरू जूलॉजिकल पार्क में विदेश मंत्रालय और तेलंगाना वन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (IBCA) कार्यशाला “शेयर्ड स्ट्राइप्स – शेयर्ड फ्यूचर” का उद्घाटन करने के बाद संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने कहा कि भारत बाघ, तेंदुआ, एशियाई शेर और हिम तेंदुआ जैसी बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण में विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल पर्यावरणीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभ्यता का प्रतीक भी है।
नेहरू जूलॉजिकल पार्क की सराहना
शिव प्रताप शुक्ला ने नेहरू जूलॉजिकल पार्क की सराहना करते हुए कहा कि यह देश के प्रमुख और उत्कृष्ट चिड़ियाघरों में से एक है, जो संरक्षण, प्रजनन और जनजागरूकता में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि “शेयर्ड स्ट्राइप्स – शेयर्ड फ्यूचर” कार्यक्रम प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत द्वारा अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस जैसी वैश्विक पहल की जा रही है, जिससे देशों के बीच संरक्षण, अनुसंधान और अनुभव साझा करने का मंच मिल रहा है। राज्यपाल ने कहा कि तेलंगाना जैव विविधता से समृद्ध राज्य है, जहां अमराबाद टाइगर रिजर्व और कवल अभयारण्य जैसे क्षेत्र इसकी विशेष पहचान हैं। उन्होंने कहा कि सरकार हरित विकास और जनभागीदारी को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने सभी से अपील की कि वन्यजीवों के भविष्य के लिए आज के निर्णय जिम्मेदारीपूर्ण हों, ताकि प्राकृतिक विरासत सुरक्षित रह सके।
सांस्कृतिक का अर्थ क्या होता है?
किसी समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों, कला, भाषा, रहन-सहन और जीवन मूल्यों से जुड़ी चीजों को सांस्कृतिक कहा जाता है। यह शब्द किसी समुदाय की पहचान और उसकी सामाजिक विरासत को दर्शाता है। नृत्य, संगीत, त्योहार, पहनावा और खानपान भी इसके महत्वपूर्ण हिस्से माने जाते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी अलग सांस्कृतिक विशेषताएं होती हैं। समाज की पुरानी परंपराओं और आधुनिक जीवनशैली के मेल से सांस्कृतिक पहचान विकसित होती है और पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रहती है।
सांस्कृतिक भाषा का क्या अर्थ है?
ऐसी भाषा जिसमें किसी समाज की परंपराएं, साहित्य, कला और ऐतिहासिक विरासत झलकती हो, उसे सांस्कृतिक भाषा कहा जाता है। यह केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि लोगों की पहचान और सभ्यता को भी दर्शाती है। लोकगीत, कहावतें, धार्मिक ग्रंथ और साहित्यिक रचनाएं किसी भाषा की सांस्कृतिक विशेषताओं को मजबूत बनाती हैं। कई भाषाएं अपने क्षेत्र की संस्कृति को पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। समाज के इतिहास और जीवन मूल्यों को समझने में भी ऐसी भाषाओं का विशेष महत्व माना जाता है।
संस्कृति शब्द का क्या अर्थ है?
मानव जीवन के विचार, आचार, परंपराएं, कला, ज्ञान और सामाजिक व्यवहार के समग्र रूप को संस्कृति कहा जाता है। यह किसी समाज की पहचान और उसकी जीवन शैली को दर्शाती है। खानपान, पहनावा, भाषा, संगीत, नृत्य और धार्मिक मान्यताएं इसके प्रमुख हिस्से माने जाते हैं। अलग-अलग देशों और समुदायों की अपनी अलग संस्कृति होती है। समय के साथ इसमें बदलाव भी आते रहते हैं, लेकिन पुरानी परंपराएं और मूल्य समाज की ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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