हैदराबाद। तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क (Deputy Chief Minister Bhatti Vikramarka) ने कहा कि राज्य सरकार न्यूनतम मजदूरी में वैज्ञानिक और व्यावहारिक संशोधन लागू करके विभिन्न क्षेत्रों के श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध है। सोमवार को महात्मा ज्योतिराव फुले प्रजा भवन में न्यूनतम वेतन संशोधन पर कैबिनेट उप-समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए, उपमुख्यमंत्री (Deputy Chief Minister) ने कहा कि सरकार अन्य प्रमुख राज्यों में अपनाई गई वेतन नीतियों का अध्ययन कर रही है और प्रस्तावित राष्ट्रीय श्रम संहिता के संभावित प्रभाव की जांच कर रही है।
बैठक में मंत्री गद्दाम विवेक वेंकटस्वामी, पोन्नम प्रभाकर और डुडिला श्रीधर बाबू के साथ-साथ राज्यसभा सदस्य वेम नरेंद्र रेड्डी और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि वेतन संशोधन केवल संख्यात्मक वृद्धि के बजाय वास्तविक जीवन यापन लागत और मुद्रास्फीति को प्रतिबिंबित करना चाहिए। समिति ने तेलंगाना भर में संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में लाखों कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से श्रमिक-हितैषी वेतन नीतियां बनाने का संकल्प लिया।
गांजा तस्करी में कितने साल की सजा होती है?
भारत में मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों में सजा मात्रा और परिस्थितियों पर निर्भर करती है। Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 के तहत कम मात्रा, व्यावसायिक मात्रा और बड़े नेटवर्क से जुड़े मामलों में अलग-अलग दंड निर्धारित हैं। गंभीर मामलों में कई वर्षों की कैद और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। व्यावसायिक स्तर की तस्करी में सजा काफी कठोर मानी जाती है। अदालत मामले के सबूत, मात्रा और आरोपी की भूमिका के आधार पर निर्णय देती है।
भारत में तस्करी की सजा क्या है?
अवैध वस्तुओं, मादक पदार्थों, हथियारों या मानव तस्करी जैसे अपराधों में अलग-अलग कानूनों के तहत कार्रवाई की जाती है। अपराध की प्रकृति और गंभीरता के अनुसार जुर्माना, कारावास या दोनों दंड दिए जा सकते हैं। कुछ मामलों में लंबी जेल सजा का प्रावधान भी होता है। सीमा पार अवैध व्यापार और संगठित अपराधों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला माना जाता है। अदालत उपलब्ध सबूतों और कानून के अनुसार सजा तय करती है।
गांजा पीने पर कौन सी धारा लगती है?
मादक पदार्थों के सेवन और कब्जे से जुड़े मामलों में कार्रवाई मुख्य रूप से Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 के प्रावधानों के तहत की जाती है। अलग-अलग परिस्थितियों में विभिन्न धाराएं लागू हो सकती हैं। यदि किसी व्यक्ति के पास प्रतिबंधित मात्रा में पदार्थ पाया जाता है या सेवन साबित होता है, तो पुलिस संबंधित कानूनी धाराओं के अनुसार मामला दर्ज कर सकती है। सजा और कार्रवाई मात्रा, उद्देश्य और मामले की स्थिति पर निर्भर करती है। कानूनी सलाह के लिए योग्य वकील से संपर्क करना उचित माना जाता है।
भारत में गांजा कब बैन हुआ था?
देश में मादक पदार्थों को नियंत्रित करने के लिए वर्ष 1985 में Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 लागू किया गया था। इसी कानून के बाद गांजा और अन्य कई नशीले पदार्थों के उत्पादन, बिक्री और उपयोग पर कड़े नियम लागू किए गए। इसका उद्देश्य नशे के अवैध व्यापार और दुरुपयोग को रोकना था। हालांकि कुछ पारंपरिक और औषधीय उपयोगों के लिए अलग नियम भी मौजूद हैं। कानून के उल्लंघन पर सख्त दंड का प्रावधान रखा गया है।
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