हैदराबाद। पर्यटन, संस्कृति और आबकारी मंत्री जुपल्ली कृष्णा राव (Jupally Krishna Rao) ने कहा है कि गोर बंजारा समुदाय के इतिहास को पहली बार उपन्यास के रूप में प्रस्तुत किया जाना एक सराहनीय पहल है। इससे गोर बंजारा साहित्य के विकास को नई दिशा मिलेगी। शनिवार को रविंद्र भारती स्थित अपने कक्ष में मंत्री ने तेलंगाना साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित गोर बंजारा समुदाय पर आधारित पहली तेलुगु ऐतिहासिक उपन्यास पोर्यातारा (novel poryatara) का विमोचन किया।
गोर बंजारा समुदाय का गौरवशाली इतिहास
इस अवसर पर जुपल्ली कृष्णा राव ने कहा कि गोर बंजारा समुदाय का गौरवशाली इतिहास दुनिया के कई हिस्सों में फैला हुआ है, लेकिन अब तक वह लिखित रूप में व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं था। उन्होंने कहा कि इस उपन्यास के माध्यम से समुदाय के इतिहास को साहित्यिक स्वरूप मिला है। मंत्री ने उपन्यास के लेखक आम गोथ वेंकट पवार को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने गोर बंजारा समाज की जीवनशैली, संस्कृति, साहसिक यात्राओं और संघर्षों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।
इतिहास को प्रकाशित करने के उद्देश्य से आगे बढ़ रही है सरकार
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आदिवासी और जनजातीय समुदायों के इतिहास को प्रकाशित करने के उद्देश्य से आगे बढ़ रही है, ताकि तेलंगाना की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को संरक्षित किया जा सके। कार्यक्रम में तेलंगाना अनुसूचित जनजाति सहकारी वित्त विकास निगम (ट्राइकोर) के अध्यक्ष डॉ. तेजावत बेल्लैया नाइक, तेलंगाना साहित्य अकादमी के सचिव डॉ. बालाचारी, लेखक वेंकट पवार, दिनाकर सहित अन्य साहित्यकार और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
गोर बंजारा क्या हैं?
भारत का एक प्राचीन घुमंतू समुदाय माना जाता है, जो ऐतिहासिक रूप से व्यापार, पशुपालन और सामान ढोने के कार्य से जुड़ा रहा है। अपनी विशिष्ट गोर बोली, रंगीन पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत, नृत्य और सामाजिक परंपराओं के कारण समाज में अलग पहचान रखता है।
बंजारा जाति में कौन शादी कर सकता है?
समुदाय के नियमों के अनुसार विवाह सामान्यतः अपनी ही बंजारा जाति के भीतर किया जाता है। समान गोत्र में विवाह निषिद्ध माना जाता है। परिवार और समाज के बुजुर्गों की सहमति आवश्यक होती है तथा परंपरागत रीति-रिवाजों से विवाह संपन्न किया जाता है।
बंजारा का दूसरा नाम क्या है?
भारत के विभिन्न राज्यों में इस समुदाय को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। लमाणी, लम्बाडा, गोर, सुगाली और वंजारा जैसे नाम प्रचलित हैं। क्षेत्रीय भाषा, इतिहास और स्थानीय परंपराओं के आधार पर इन नामों का उपयोग होता है।
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