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Drugs : तेलंगाना में ड्रग्स के खिलाफ और सख्त रुख अपनाने का निर्देश

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: May 7, 2026 • 9:45 PM
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हैदराबाद। तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक सी.वी. आनंद (C.V. Anand) ने राज्य में नशीले पदार्थों के खिलाफ चल रहे अभियान को और तेज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने गुरुवार को हैदराबाद स्थित मुख्यालय में नवगठित “ईगल फोर्स” की पहली विस्तृत समीक्षा की। डीजीपी (DGP) ने कहा कि पदभार संभालने के बाद उन्होंने सबसे पहले इसी विशेष इकाई की समीक्षा इसलिए की क्योंकि इसका गठन समाज को प्रभावित कर रहे नशे के खतरे से निपटने के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों की आपूर्ति और सेवन की समस्या केवल तेलंगाना ही नहीं बल्कि देश और दुनिया के कई हिस्सों में गंभीर रूप ले चुकी है। उन्होंने समाज से अपील की कि सभी लोग मिलकर नशे के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करें ताकि युवाओं और छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

डीजीपी सी.वी. आनंद “ईगल फोर्स” की समीक्षा की

डीजीपी ने बताया कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने पुलिस अधिकारियों को राज्य से नशे के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह एक “नशे की महामारी” है, जो कई परिवारों को प्रभावित कर रही है और इसे जड़ से समाप्त करना आवश्यक है। सी.वी. आनंद ने कहा कि केवल एक ब्यूरो बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र को सक्रिय रूप से काम करना होगा। उन्होंने बताया कि “ईगल फोर्स” को तकनीक के उपयोग, मनी ट्रेल की जांच और विदेशी ड्रग नेटवर्क को ध्वस्त करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। अधिकारियों ने जानकारी दी कि हैदराबाद, साइबराबाद, राचकोंडा और वारंगल कमिश्नरेट्स के चार नारकोटिक पुलिस स्टेशनों, सात क्षेत्रीय इकाइयों और 20 प्रवर्तन विंग्स के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है।

राज्य में प्रति मामले गिरफ्तारी दर राष्ट्रीय औसत से अधिक

डीजीपी ने कहा कि राज्य में प्रति मामले गिरफ्तारी दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है, जिससे स्पष्ट होता है कि केवल छोटे सप्लायर्स ही नहीं, बल्कि मास्टरमाइंड्स पर भी कार्रवाई हो रही है। अधिकारियों ने डीजीपी को बताया कि ईगल फोर्स ने नाइजीरियाई ड्रग कार्टेल्स और गोवा तथा दिल्ली से संचालित हवाला नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। ड्रग्स की तस्करी के लिए कूरियर सेवाओं का भी उपयोग किया जा रहा था, जिसे तकनीक की मदद से पकड़ा गया। अब तक लगभग 93 विदेशी नागरिकों (नाइजीरिया, घाना, सूडान आदि) को देश से निर्वासित किया गया है। डीजीपी ने सोशल मीडिया, डार्क वेब और क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन पर निरंतर निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने डिजिटल फॉरेंसिक और जियो-लोकेशन ट्रैकिंग को मजबूत करने पर जोर दिया।

राज्य में दोषसिद्धि दर 19 प्रतिशत से बढ़कर 28 प्रतिशत

उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में दोषसिद्धि दर 19 प्रतिशत से बढ़कर 28 प्रतिशत हो गई है, जो पुलिस कार्रवाई की प्रभावशीलता को दर्शाता है। डीजीपी ने कहा कि कई शैक्षणिक संस्थान छात्रों के नशे की चपेट में आने पर जिम्मेदारी से बचते हैं, जो गंभीर लापरवाही है। उन्होंने बताया कि लगभग 4,500 एंटी-ड्रग कमेटियां बनी हैं, लेकिन वे अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही हैं। अब स्कूलों और कॉलेजों में “समग्र समिति” बनाने का प्रस्ताव है, जो नशा, रैगिंग, साइबर अपराध, महिला सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों पर निगरानी रखेगी। साथ ही छात्रों से “मैं नशा नहीं करूंगा” का शपथ-पत्र भी लिया जाएगा। बैठक में ईगल फोर्स के निदेशक संदीप शांडिल्य सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पद्मजा, सीताराम, रघुवीर और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

ड्रग्स का अर्थ क्या होता है?

सामान्य रूप से यह शब्द उन पदार्थों के लिए उपयोग किया जाता है जो शरीर या दिमाग पर प्रभाव डालते हैं। इनमें दवाइयां भी शामिल हो सकती हैं और ऐसे नशीले पदार्थ भी, जिनका गलत उपयोग किया जाता है। कुछ पदार्थ इलाज के लिए उपयोगी होते हैं, जबकि कुछ का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है।

ड्रग्स का नशा कितनी देर तक रहता है?

असर की अवधि पदार्थ के प्रकार, मात्रा और व्यक्ति की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करती है। कुछ नशीले पदार्थों का प्रभाव कुछ मिनटों तक रहता है, जबकि कुछ का असर कई घंटों या दिनों तक महसूस हो सकता है। अधिक सेवन से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं और मानसिक तथा शारीरिक नुकसान भी हो सकता है।

ड्रग्स क्या हैं?

ऐसे रासायनिक पदार्थ जो शरीर, मस्तिष्क या व्यवहार पर प्रभाव डालते हैं, उन्हें ड्रग्स कहा जाता है। इनमें चिकित्सीय दवाएं और नशीले पदार्थ दोनों शामिल हो सकते हैं। डॉक्टर की सलाह से उपयोग की जाने वाली दवाएं इलाज के लिए होती हैं, जबकि अवैध नशीले पदार्थों का गलत उपयोग लत और स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

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